दीपक शर्मा,वरिष्ठ पत्रकारपत्रकारों के छोटे छोटे मसले हो..चाहे वेतन से जुड़े हों या नौकरी से, अगर अटल बिहारी वाजपेयी दिल्ली में होते तो प्रेस क्लब के गेट पर ज़रूर पहुँचते. धरना हो या रैली,वो कुछ देर बैठते , कुछ दूर साथ चलते. कम लोग जानते हैं कि वाजपेयी, दिल्ली से छपने वाले अखबार वीर अर्जुन के कई साल संपादक रहे. तब उनके पास दिल्ली में घर नही था तो अक्सर अख़बार के दफ्तर में ही चादर बिछा रात में सो जाते थे. 1957 में जब वो संसद पहुंचे तो फिर घर भी उन्हें मिल गया. ये महज़ इत्तेफाक है कि अटलजी, शास्त्री भवन के सामने स्थित प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया के आसपास ही रहे. 60 के दशक में वो थोड़ी दूर स्थित राजेंद्र प्रसाद रोड पर रहते थे और 80 के दशक आते आते तो वो 6 रायसीना रोड के बंगले में ही आ गए. 6 रायसीना रोड , प्रेस क्लब से बस चंद कदम ही दूर है. ऐसा नही कि अटलजी सत्तर के दशक में देश की राजनीती में किसी गिनती में नही थे. बल्कि प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया की पुरानी फाइल के मुताबिक, 1970 -71 में देश के जिन शीर्षस्थ नेताओं को प्रेस क्लब ने आमंत्रित किया उसमे जगजीवन राम, मधुलिमये और अटल बिहारी वाजपेयी प्रमुख थे. इस फाइल में ये भी लिखा है कि सिर्फ अटलजी ही बड़े नेताओं में एक थे जो खुद पत्रकारों की चाय पीने के लिए प्रेस क्लब सहजता से पहुँचते थे. उन्हें कई बार पैदल आते हुए देखा गया. और प्रेस क्लब आने का उनका सिलसिला कई वर्षों तक चला. मित्रों, ये पोस्ट बेहद साधारण सी है लेकिन इस पोस्ट का सिर्फ एक शब्द ज़रूर मन में संजो लीजियेगा. शब्द है सहजता. simplicity. ये नेता ही नही बड़े आदमी की पहचान है. ( ये चित्र भी प्रेस क्लब आफ इंडिया की पुराने फाइल से. इस चित्र को प्रेस क्लब ने अपनी पत्रिका में भी प्रकाशित किया है) @fb
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Staff Writer · Media Khabar
