NDTV बैन के मुद्दे पर मीडिया के महापुरुषों को खुला खत

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अमित गर्ग शुक्ला
अमित गर्ग शुक्ला

– अमित गर्ग शुक्ला –

अमित गर्ग शुक्ला
अमित गर्ग शुक्ला

पिछले दो दिनों में NDTV पर एकदिवसीय प्रतिबंध से संबंधित सैकड़ों पोस्ट पढ़े । ज़्यादातर मीडिया के महापुरुषों ने बैन का विरोध किया है । और इसके लिए सबने अपने-अपने तर्क दिए हैं । उनके तर्कों को आप फेसबुक पर पढ़ लीजिएगा । फिलहाल बात अभी थोड़ी देर पहले देखे एक वीडियो संदेश की । जिसे मीडिया के एक महापुरुष ने पोस्ट किया है । उन्होंने भी बैन की निंदा करते हुए अपने तर्क दिए हैं । और साथ ही सभी संपादकों से बैन के ख़िलाफ एकजुट होने की अपील की है । सर ने तर्क दिया है कि मीडिया को रेगुलेट करने के लिए NBSA (National Broadcasting Standard Authority) नाम की एक संस्था है । जो बहुत ही कड़ाई से कुछ भी ग़लत दिखाने पर चैनल्स के ख़िलाफ एक्शन लेती है । ऐसे में उस संस्था के होते हुए सरकार को किसी चैनल को बैन करने का कोई अधिकार नहीं । सर की बात बहुत हो गई । अब बात अपनी । यहां आप लोगों के लिए ये जान लेना बहुत ज़रूरी है कि NBSA के ज़्यादातर पदों पर मीडिया के महापुरुष ही विराजमान हैं । जिनमें NDTV के भी कई बुद्धिजीवी शामिल हैं । कुल मिलाकर ये समझिए कि बिल्ली को ही दूध की रखवाली सौंप दी गई है । NBSA की और अधिक जानकारी के लिए Google कर लीजिएगा ।

फिलहाल मैं आगे बढ़ता हूं । 1999 में करगिल युद्ध के दौरान बरखा दत्त समेत कई रिपोर्टर ग्राउंड ज़ीरो से LIVE दे रहे थे । और उस LIVE को देखकर पाकिस्तान की सेना हमारे जवानों को ढेर कर रही थी । उस वक्त NBSA नाम की ये बिल्ली पैदा भी नहीं हुई थी । इसलिए देख ही नहीं पाई कि दूध कौन पी गया । 26/11 यानि मुंबई हमले के दौरान लगभग सभी चैनल्स ने LIVE कवरेज दिखाया । और पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के आका भारतीय न्यूज़ चैनल्स का LIVE देखकर ‘कसाब एंड कंपनी’ को पल पल की जानकारी दे रहे थे । तब NBSA नाम की ये बिल्ली दूध की रखवाली कर रही थी । और आतंकी उसी दूध से दही और फिर रायता बनाकर फैला रहे थे । अगर वाकई में ये बिल्ली सही तरीके से अपनी ड्यूटी निभा रही होती । तो कायदे से उसी दौरान सभी चैनल्स को काला कर देना चाहिए था । कुछ दिनों के लिए । लेकिन अफसोस तब ना तो NBSA के कान पर जूं रेंगी और ना ही तत्कालीन सरकार के कानों पर । क्योंकि उस सरकार के मुखिया “हज़ार जवाब देने से बेहतर ख़ामोश रहना” पसंद करते थे । माफ करिएगा सर नोटिस भेजने के अलावा आपका NBSA किसी काम का नहीं । और उसके भेजे नोटिस चैनल्स की रद्दी की टोकरी में डाल दिए जाते हैं । इससे ज़्यादा और कुछ औकात नहीं है आपके NBSA की ।

सांप, बिच्छू, नेवला, अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय, लाल किताब अमृत, निर्मल दरबार, जन्म कुंडली, हकीम उस्मानी, सोना बेल्ट, और सिद्धू का इंग्लिश स्पीकिंग कोर्स.. ये सब दिखाने के लिए मिलता है न्यूज़ चैनल का लाइसेंस ? अगर नहीं तो फिर क्यों दिखाया जा रहा है ये सब ? और कहां है NBSA ? हक़ीक़त तो ये है सर कि सब मनमानी चल रहा है । जो आपका मन करता है । जिससे आपको TRP मिलती है । आप वही सब दिखा रहे हैं । और दोष मढ़ रहे हैं दर्शकों पर कि दर्शक यही सब देखना चाहते हैं । किसी गांव के मेले में बार बलाओं का डांस हो जाता है । तो आप कहते हैं अश्लीलता परोसी जा रही है । और 5 मिनट के विज़ुअल को Loop पर लगाकर 15 मिनट तक दिखाते रहने को क्या परोसना कहते हैं ? कभी सोचा है आपने ? गांव में बार बलाएं नाचीं तो 100 लोगों ने देखा । आपने टीवी पर 15 मिनट नचाया तो लाखों लोगों ने देखा । अब बताइए अश्लीलता कौन परोस रहा है? गांव वाले? या आप? सड़क पर एक पुलिस वाला पीकर लुढ़क जाए । तो बैक ग्राउंड म्युज़िक के साथ ‘थोड़ी सी जो पी ली है” दिखाते हुए सवाल खड़े करते हैं । और लिखते हैं ख़ाकी हुई शर्मसार । और रात 8 बजे के बाद फिल्म सिटी में जो ‘कार-बार’ सजता है । कभी उसकी भी तस्वीर दिखाई आपने ? और कभी कहा कि देखिए कैसे लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ पीकर लुढ़क रहा है । एक एंकर महोदय तो LIVE बुलेटिन के दौरान पीते हैं । ये क्यों नहीं दिखता आपके NBSA को । कहने का मतलब ये कि सुविधा की पत्रकारिता करते हैं आप? भूल जाइए सर अब नहीं होगा । क्योंकि अब ‘राजा’ और ‘प्रजा’ दोनों ही आप लोगों की हक़ीक़त जान चुके है ।

NBSA की बात बहुत हो गई । चलिए अब एकजुटता की बात कर ली जाए । सर ने अपने संदेश में कहा कि सभी लोग एकजुट होकर बैन के ख़िलाफ सरकार का विरोध करें । किसे एकजुट होने के लिए कह रहे हैं आप ? इन्टर्न, ट्रेनी, 5 हज़ार से 15 हज़ार पाने वाले युवा पत्रकार, दिनभर आपकी गाली खाने वाले रिपोर्टर और 6-6 महीने तक वेतन ना पाने वाले स्ट्रिंगर से एकजुट होने के लिए कह रहे हैं ? कभी इनके हक़ के लिए भी कोई संदेश दिया आपने? नहीं दिया । क्योंकि आपकी नज़र में इनकी कोई औकात ही नहीं है । कभी सीधे मुंह बात नहीं की मीडिया के महापुरुषों ने इनसे । अच्छा होता यही एकजुटता आप लोगों ने तब भी दिखाई होती । जब IBN7 से 300 से ज़्यादा लोगों को निकाल दिया गया । NDTV को एक दिन के लिए काला किया जा रहा है तो आप छाती पीट रहे हैं । NEWS EXPRESS, P7, महुआ NEWS के मालिकों ने चैनल को हमेशा के लिए काला कर दिया । और हज़ारों लोग बेरोज़गार हो गए । तब आपकी एकजुटता घास चरने चली गई थी ?

यही नहीं सहारा में महीनों से लोग बिना सैलरी पाए काम कर रहे हैं । वो नहीं दिख रहा है आपको । कुकुरमुत्तों की तरह नए चैनल आते हैं और बंद हो जाते हैं । हज़ारों पत्रकार बेरोज़गार हो जाते हैं । और आप मौन साधे रह जाते हैं । छोटी-छोटी गलतियों पर पत्रकारों को नौकरी से निकाल दिया जाता है । तब चैनल मालिक के ख़िलाफ एकजुटता दिखाने की बजाय आप अपनी कुर्सी से चिपके रह जाते हैं । क्यों सर ये दोहरा चरित्र क्यों? जवाब नहीं देंगे आप । मैं बताता हूं क्यों । क्योंकि जब चैनल मालिक आपसे घाटे का रोना रोते हैं । तब आप उन्हे cost cutting की घुट्टी पिलाते है । 10 पत्रकारों को निकलवाकर 20 का काम 10 से करवाते हैं । और जब तक आपको लात पड़ती है । तब तक दिल्ली-NCR में आपकी 4 कोठियां तन चुकी होती हैं । और वो 15 हज़ार पाने वाला पत्रकार दर-दर की ठोकरें खा रहा होता है । तब आपको चौथा स्तम्भ दम तोड़ते हुए नहीं दिखता है । और आज चौथे स्तंभ को बचाने के लिए आप उन्हीं शोषित पत्रकारों से एकजुट होने की अपील कर रहे हैं । मत सुनिएगा मीडिया के इन महापुरुषों की बात । ये किसी के सगे नहीं है । मैं एक ऐसी युवा पत्रकार को भी जानता हूं । जिसे रवीश कुमार के कहने पर ओम थानवी ने नौकरी से निकलवा दिया था । क्योंकि उसने कश्मीर के मुद्दे पर फेसबुक पर अपने विचार लिख दिए थे । कल को मीडिया के ये महापुरुष आपके साथ भी यही करेंगे । ध्यान रखिएगा । इसलिए लड़ाई लड़नी है तो पहले मीडिया के भीतर की इस बुराई से लड़ाई लड़िए । सहमत हैं तो share करिएगा ताकी मीडिया के महापुरुषों तक पहुंच पाए । धन्यवाद ।

2 COMMENTS

  1. Amit Ji ki kahi saari baatein sahi hain per we zyada bhawuk deekh rahe hain
    sabse pehli baat ki NBSA ki zimmedari content ki hai na ki naukri aur anya cheezon ki
    aur NBSA me hamesha hi news channels k hi log rahte hain, magar iska matlab ye nahi ki koi karrwayi nahin ki jaati. NDTV bhi uska hi ek sadasya h

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