टाटा का मामला आते ही मीडिया की घिग्गी बंध गयी,अकेले लड़ रहा ये शख्स!

सोशल मीडिया के जमाने में भी टाटा जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ आवाज़ उठाना और लड़ाई लड़ना आसान नहीं. क्योंकि विज्ञापन और पैसों की बदौलत आप मीडिया को भी खरीद सकते हैं. फिर आपकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बनकर रह जायेगी. कुछ ऐसा ही हुआ टाटा के टाटा समूह के टाटा वैल्यू होम्स के पूर्व प्रोजेक्ट हेड नित्यानंद सिन्हा के साथ. उन्होंने टाटा वैल्यू होम्स में हो रहे बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है जिसके एवज में उन्हें अपनी नौकरी गंवाने के साथ-साथ टाटा समूह के कोपभाजन का सामना भी करना पड़ रहा है.

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सोशल मीडिया के जमाने में भी टाटा जैसी बड़ी कंपनियों के खिलाफ आवाज़ उठाना और लड़ाई लड़ना आसान नहीं. क्योंकि विज्ञापन और पैसों की बदौलत आप मीडिया को भी खरीद सकते हैं. फिर आपकी आवाज नक्कारखाने में तूती की आवाज़ बनकर रह जायेगी. कुछ ऐसा ही हुआ टाटा के टाटा समूह के टाटा वैल्यू होम्स के पूर्व प्रोजेक्ट हेड नित्यानंद सिन्हा के साथ. उन्होंने टाटा वैल्यू होम्स में हो रहे बड़े घोटाले का पर्दाफाश किया है जिसके एवज में उन्हें अपनी नौकरी गंवाने के साथ-साथ टाटा समूह के कोपभाजन का सामना भी करना पड़ रहा है.

मामला बहुत बड़ा है और सीधे-सीधे ग्राहकों के हित से जुड़ा हुआ है. दरअसल टाटा समूह की एक कंपनी टाटा वैल्यू होम्स ग्राहकों से सेल एरिया बढाकर धोखाधड़ी कर रही है लेकिन टाटा के आला अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है. जैसा कि आप जानते ही हैं कि ज्यादातर रियल एस्टेट कंपनियों ने आवासीय फ्लैट बिक्री में सेल एरिया को अपनी अवैध कमाई का एक जरिया बना रखा है, जिसके कारण भारतीय संसद ने रियल एस्टेट रेगुलेशन एक्ट पारित किया ताकि आगे से फ्लैट की बिक्री कारपेट एरिया के आधार पर होगी जो की हरेक ग्राहक माप सकता है, जबकि सेल एरिया को मापना एक गहन तकनीकी विषय है|

nityanand sinha facebook band
नित्यानंद सिन्हा के फेसबुक एकाउंट पर रोक

टाटा वैल्यू होम्स अपनी एक सहयोगी कंपनी एच एल प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से बहादुरगढ़ हरियाणा में मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए एक बहुमंजिली आवासीय परियोजना बना रही है| यहाँ बहादुरगढ़ में स्थानीय डेवलपर्स 2400-2800 रुपये प्रति वर्गफीट के दर से फ्लैट बेच रहे थे वहीँ टाटा समूह का आगमन हुआ कि हम पूरे ईमानदार और विश्वसनीय कंपनी हैं और आप हमें 4000 रूपये प्रति वर्ग फीट की दर देकर भी फायदे में रहेंगे| लेकिन आरोप के मुताबिक ऐसा नहीं हुआ और ग्राहकों के साथ ठगैती हुई.ग्राहकों से हरेक फ्लैट के लिए, साइज़ के मुताबिक, 4,40,000 से लेकर 6,70,000 तक ज्यादा पैसे लिए गए.यानी की गला कट गया और पता भी ना चला| ये सारी बातें सबूतों के साथ दिल्ली सरकार और हरियाणा सरकार दोनों को कंपनी के ही एक पूर्व कर्मचारी नित्या नन्द सिन्हा ने लिखित शिकायत में दी है जिसपर हरियाणा सरकार उपायुक्त, जिला झज्जर की अध्यक्षता में जाँच भी कर रही है|

दिनांक 07 मार्च 2016 की शिकायत में कंपनी का एक ईमेल संलग्न है जो दिनांक 3 मार्च 2015 को भेजा गया था और लिखता है की “2 बेडरूम हॉल किचेन फ्लैट के लिए 41% और 3 बेडरूम हॉल किचेन फ्लैट के लिए 39% लोडिंग का निर्णय लिया गया”| अब दूसरी तरफ उसी दिनांक 3 मार्च 2015 को कम्पनी द्वारा “प्राइसिंग टास्क फोर्स” नामक दस्तावेज भेजा गया जो की कई जगहों पर 30% सेल एरिया लोडिंग की बात करता है| कंपनी सूत्र ये बताते हैं कि “प्राइसिंग टास्क फोर्स” एक अति महत्वपूर्ण दस्तावेज है जो कंपनी के द्वारा परियोजना की बिक्री एवं दर के बारे में दिशानिर्देश निर्धारित करती है| उपलब्ध दस्तावेजों में आश्चर्यजनक तथ्य है कि एक ही तारीख में दो दस्तावेजों में अलग-अलग सेल एरिया है यानी एरिया जो बाकायदा नक्शों में हरियाणा सरकार द्वारा एप्रूव्ड है वो एरिया न हो कर इलास्टिक स्प्रिंग बन गया जिसे जब चाहो खींच दो|

उपरोक्त शिकायत दर्शाती है कि जब कंपनी द्वारा धोखाधडी की शुरुआत की गयी तो जेन्युइन कारपेट एरिया में सिर्फ 1 से लेकर 7 वर्ग फीट की बढ़त हुई लेकिन जेन्युइन सेल एरिया में 107 से लेकर 136 वर्ग फीट की बढ़त हो गयी यानी की गंगा ही उलटी बहने लगीं| ज्ञात हो कि टाटा वैल्यू होम्स इस परियोजना को “वन नेशन वन प्राइस” विज्ञापन के तहत देश भर में ऑनलाइन ओर ऑफलाइन बेचती रही है और देश भर के मध्यमवर्गीय नागरिक इसमें छले जा रहे हैं|

nityanand sinha tata scam 3रियल एस्टेट सेक्टर में ये चर्चा का विषय है की टाटा कंपनी अपनी गलतियों पर पर्दा डालने के लिए वकीलों का सहारा लेकर उक्त व्हिसलब्लोअर कर्मचारी को परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है| हरियाणा की खट्टर सरकार एक साल बीत जाने के बाद भी अभी तक दूध का दूध एवं पानी का पानी नहीं कर सकी है| टाटा के विज्ञापन के दवाब में राष्ट्रीय मीडिया भी इस मुद्दे को उछालने से परहेज कर रही है. हालाँकि वरिष्ठ पत्रकार राम बहादुर राय के संपादकीय में चल रही यथावत पत्रिका ( जुलाई 2016 ) इसपर खबर प्रकाशित की. फिर इंडिया संवाद और कुछेक और संस्थानों ने भी इसे खबर बनायी. लेकिन बाकी का मेनस्ट्रीम मीडिया खामोश रहा. ऐसे में नित्यानंद सिन्हा के लिए ये लड़ाई बेहद कठिन है जिसे वे साहस से अकेले लड़ रहे हैं. उसपर तुर्रा है कि वे अदालती कार्रवाई की वजह से खुलकर कुछ बोल भी नहीं सकते. फेसबुक एकाउंट पर भी लिखने से उन्हें कोर्ट की तरफ से मनाही है. उधर टाटा समूह कानूनी जंजाल में फंसाकर उन्हें तोड़ने में लगा है. लेकिन उनकी जंग जारी है. क्या मेनस्ट्रीम मीडिया जागेगा या टाटा के फेंके हुए विज्ञापनों में ही खोया रहेगा?nityanand story on Yathawat Magazine

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