मुस्लिम महिलाओं की आशा के केंद्र में प्र. मोदी,चैनलों पर ‘तलाक’ का ‘मजमा’

मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज उठायी हैं 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में विषय पर विचार होगा हर मुस्लिम महिला उनके बच्चे मोदी जी की तरफ आँखों में आंसू भरे आशा भरी नजरों से देख रही हैं |

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modi triple talaq
ट्रिपल तलाक और पीएम मोदी

डॉ शोभा भारद्वाज

बचपन की याद कभी जेहन से मिटी नहीं मेरे पिताजी के मित्र थे पीर मुहम्मद इलाहाबाद के सम्मानित व्यक्ति थे वह पाँच भाई थे उनकी इकलौती बहन का नाम ? अब उनका नामकरण ‘छुटटो’ हो गया था बड़े छुटटो ,बच्चे छुटटो बुआ कहते थे खूबसूरत सलीकेदार थीं परन्तु कभी बावर्ची खाने से बाहर नहीं निकलीं घर की देहरी भूल चुकी थी | शादी हुई थी शौहर ने एक दिन घर के दरवाजे पर खड़े होकर तीन बार तलाक कह कर निकाह की जंजीर तोड़ दी | बेजुबान बुआ का कसूर क्या था ?उनकी माँ कहती थी तकदीर

चैनल में ट्रिपल तलाक पर बहस चल रही थी मुस्लिम महिलायें भी बुलायीं गयी मौलाना भी भी बड़े ठसके से आये थे उन्होंने हदीस का हवाला देकर समझाया इस्लाम अबला का रक्षक बन कर आया है, दासता से मुक्ति दिलाई पिता की सम्पत्ति पर अधिकार दिलवाया , सही होगा खुदाई जुबान है | महिलायें झुण्ड की तरह लाई गयीं थी सब के मुहँ पर नकाब था हरेक से अलग – अलग पूछो ट्रिपल तलाक के खिलाफ थीं शौहर दूसरी बीबी लेकर आता है तकलीफ होती हैं आँखों से पानी बहता है दम घुटता है | उन्हें दुःख था वह पढ़ीं लिखी नहीं है किसी ने पढ़ाने पर तवज्जों नहीं दी हाँ नमाज पढ़ना जानती है एंकर ने पूछा क्या ट्रिपल तलाक ठीक है ?सब एक साथ बोलीं “नहीं” यदि शौहर दे दे ? कुछ चुप रहीं कुछ ने एक साथ कहा हमारी तकदीर , हम विरोध नहीं कर सकतीं अल्लाह का हुक्म बदला नहीं जा सकता “हम नबी के हुक्म और शरीयत को मानती हैं”| उन्हें यही समझाया गया था| वह बोलने की सजा भी जानती थी मौलानाओं ने कहा देख लीजिये सुन लीजिये मुस्लिम महिलायें मजहबी मामलों में सरकारी दखल के खिलाफ हैं |इस्लाम के खिलाफ प्रोपगंडा किया जा रहा है|

ट्रिपल तलाक पर मौलानाओं के दो पक्ष है एक कहता है ट्रिपल तलाक को एक माना जाये दूसरा पक्ष कहता है तीन बार तलाक कहना गुनाह है परन्तु तलाक तो हो गया अब लौट नहीं सकता यदि शौहर फिर से बीबी को रखना चाहता है हलाला होगा यही हदीस कहती है | क्या महिला भी तीन बार तलाक कह कर जंजीरें तोड़ सकती हैं, नहीं उनके मामले मे मौलाना तय करेंगे किस ग्राउंड पर तलाक चाहिये तलाक तीन बार शौहर ही कहेगा |इस्लामी हकूमत होती तो तीन बार तलाक कहने पर बड़े जोश में कहा शौहर को कसूरवार ठहरा कर सजा तजवीज कर सकते थे जिन 22 देशों ने ट्रिपल तलाक पर बैन लगाया है वहाँ इस्लामिक हकूमत है |

कोर्ट में अपनी वकील सहेली से मिलने गयी उस दिन एक मुस्लिम महिला के ब्यान दर्ज होने थे महिला की खूबसूरती गजब थीं आँखें काली चेहरे पर अपूर्व तेज था उसने चादर लपेटी थी साथ में 11 साल का लडका था वह माँ को परेशान कर रहा था मेरा जन्म दिन मनाओ नहीं तो मैं अब्बू के पास चला जाऊंगा फिर रोटी रहना महिला ने बताया मेरे शौहर ने तलाक लिख कर अपने भाई के हाथों भिजवा दिया वह बच्चे भी छोड़ गया |शौहर ने 20 साल की लड़की से शादी कर ली मैं पढ़ी नहीं हूँ जचगी करवाती हूँ आज कल लोग घर में जचगी पसंद नहीं करते हाँ जच्चा और बच्चे की मालिश का काम मिल जाता हैं मैने उसको कहा इसे अब्बू के पास जन्म दिन मनवाने क्यों नहीं भेजती वह डर गयी बोली वह मेरा बच्चा ले जायेगा ,मैं गारंटी लेती हूँ जैसे ब्यान खत्म हो तुम इसे भेज कर तमाशा देखो और न्याय बाद में मिलेगा हाँ तेरा बेटा अपना हो जाएगा उसने मेरी बात मान कर कलेजे पर पत्थर रख लिया कुछ देर बाद बालक रोता हुआ आया माँ से लिपट गया अम्मी रिक्शा पर अब्बू और छोटी बैठ कर चले गये मुझे पहले गाली दी फिर लात मार कर भगा दिया|

ईरान में अधेड़ उम्र के पाकिस्तानी डाक्टर के हाथ में सदैव माला रहती थी वह सबको इस्लाम पढ़ाते ‘मुसलमीन को खुदा ने जन्नत का वादा किया हैं’ एक किस्सा भी सुनाते एक अंग्रेज ने इस्लाम कबूला मजहब को जानने के बाद उसे अफ़सोस हुआ काश उसके मौम डेड ज़िंदा होते वह भी ईमान लाते उन्हें जन्नत मिलती |उन्होंने ईरानी नर्स से निकाह पढ़वा लिया उसका नाम रखा आयशा खानम मेहर सोने के सिक्कों में देनी पड़ी| कुछ समय बाद अचानक वह पाकिस्तान गये लौट कर नहीं आये आयशा परेशान थी हर पाकिस्तानी से उनकी बाबत पूछती | पाकिस्तानियों ने हमें बताया उनकी पत्नी सगी खाला की बेटी है डाक्टर साहब के करीबी रिश्तेदारों की पांच लडकियाँ उनकी बीबी के कुनबे में ब्याही हैं इनको धमकी मिली है जल्दी आओं नहीं तो सब को बच्चों सहित घर बिठा देंगे मजबूरी में गयें हैं परन्तु लौटे क्यों नहीं ?उन्होंने हंस कर कहा भाभी दोनों परिवार वालों ने हड्डियाँ तोड़ कर खाट पर डाल दिया होगा | डाक्टर साहब काफी समय बाद वापिस लौटे ‘गुमसुम’ अब उन्हें हंसी नहीं आती थी ईरानी खानम के नखरे, झेलना खुला खर्च , घर भी नियमित रूप से पैसा भेजना पड़ता था मजहब की इजाजत के बाद भी समाज के दबाब में पहले निकाह की जंजीरें तोड़ नहीं सके |

मुस्लिम महिलाओं ने ट्रिपल तलाक के खिलाफ आवाज उठायी हैं 11 मई से सुप्रीम कोर्ट में विषय पर विचार होगा हर मुस्लिम महिला उनके बच्चे मोदी जी की तरफ आँखों में आंसू भरे आशा भरी नजरों से देख रही हैं |

Dr. Shobha Bhardwaj
डॉ.शोभा भारद्वाज

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