मोतिहारी के फर्जी दल्ले फोटोग्राफर से सावधान!

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मुकेश विधार्थी

छद्दम पत्रकारिता की आड़ में किस कदर सार्वजिनक चीजों का दोहन किया जाता है. इसका जीता-जागता प्रमाण है मोतिहारी के एक पूर्व फोटो पत्रकार (हिंदुस्तान) काम……..मिश्रा. किसी भी बैनर में काम करते हुए किसी मीडियाकर्मी द्वारा दल्लागिरी की बात तो समझ में आती है. लेकिन बिना किसी मीडिया संस्थान से जुड़े कोई खुद को किसी प्रतिष्ठित अखबार या न्यूज़ चैनल का कर्मी बताकर वसूली करे, तो इसे क्या कहेंगे. ‘हरि अनंत हरि कथा अनंत’ के तर्ज पर मोतिहारी के (कु)ख्यात ब्लैकमेलर फोटोग्राफर की कहानी भी कम हैरत अंगेज नहीं है.

पूर्वी चम्पारण के एक छोटे से गाँव श्रीपुर, सुगौली से बतौर प्रखंड फोटोग्राफर पत्रकारिता की शुरुआत करने वाला फोटोग्राफर आज मुफसिल शहर मोतिहारी में करोड़ों की संपति का मालिक है. शहर के अगरवा मोहल्ले में इसका आलिशान मकान भी है. एक ग्रामीण व लघु किसान की पृष्ठ भूमि से आने वाले युवक का इतने कम समय में अकूत धन अर्जित करना करीबियों में चर्चा का विषय बन गया. आज से करीब दस साल पहले इन्होंने हिंदुस्तान, मोतिहारी से फोटोग्राफी की शरुआत की. धीरे-धीरे इनका पांव जमने लगा. फिर अखबार के तत्कालीन प्रभारी जब सच्चितानंद सत्यार्थी बने तो स्वजातीय होने के कारण इस फोटोग्राफर के दिन बहुरने लगे.

प्रभारी के साथ लौबी बना उसने वर्ष 2007-10 तक बैनर के नाम हर उस तिकड़म का इस्तेमाल किया. जिसकी बदौलत उसने येन केन प्रकरण दौलत अर्जित करने के अपने मंसूबे पूरे किए. चाहे रासायनिक खाद की माफियागिरी हो या सीमेंट का स्टॉकिस्ट बनना.

लेकिन कहा गया है, ‘जब पाप का घड़ा भरता है तो फूटता जरूर है’. ठीक उसी तरह वर्ष 2010 के दिसम्बर में प्रभारी सत्यार्थी के साथ ब्लैकमेलर फोटोग्राफर को भी गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप में अखबार से निकाल दिया गया. ये बात और है कि सत्यार्थी ने हथकंडे अपनाकर बतौर दस टकिया स्टिंगर वापसी कर ली. लेकिन तमाम पैरवी के बावजूद कामता को अखबार ने नहीं रखा. और हिन्दुस्तान ही क्यों उसकी करतूतों को जान अभी तक जिले के किसी मीडिया बैनर ने पनाह नहीं दिया. फिर भी वह जिले में खुद का परिचय एक फोटो पत्रकार के रूप में देकर विभिन्न महकमों में अपना उल्लू सीधा करता है. कहीं हिन्दुस्तान का परिचय देता है तो किसी जगह मौर्या न्यूज़ का संवाददाता बन जाता है. चाहे कृषि विभाग हो, उत्पाद विभाग हो, कस्टम हो या कलक्ट्रेट परिसर. यह हर जगह कर्मचारियों पर रॉब गाठते या अधिकारीयों की चिरौरी करते नजर आ जाता है. ऐसे में जिले के मीडियाकर्मियों से उसका सामना होता है कोई भी चुस्की लेने से बाज नहीं आता. फिर भी शर्म है कि उसे आती नहीं.

मोतिहारी से स्वतंत्र पत्रकार मुकेश विधार्थी की रिपोर्ट

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