महाराष्ट्र-हरियाणा में कांग्रेस की पराजय के मायने

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महाराष्ट्र-हरियाणा में कांग्रेस की पराजय के मायने
महाराष्ट्र-हरियाणा में कांग्रेस की पराजय के मायने

जगदीश्वर चतुर्वेदी

महाराष्ट्र-हरियाणा में कांग्रेस की पराजय के मायने
महाराष्ट्र-हरियाणा में कांग्रेस की पराजय के मायने
महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की पराजय वस्तुत: कांग्रेस की जनविरोधी नीतियों का परिणाम है, यह पराजय इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि मोदी सरकार ने या फिर नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आने के बाद कोई बड़ा काम किया है ।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्तारुढ़ होने के बाद से एक भी जनहितैषी फ़ैसला नहीं लिया है ,इसके विपरीत कई जनविरोधी फ़ैसले लिए हैं, सब्सीडी में कटौती की है, अपराधियों और माफ़िया गिरोहों के साथ खुली साँठगाँठ की है , नीतिहीन ढंग से हर तरह के तत्वों को वोटबैंक राजनीति के चलते भाजपा में संरक्षण दिया है। राजनीति में इस तरह की नीतिहीनता और अपराधियों के साथ खुली साँठगाँठ पहले कभी नहीं देखी गयी, स्थिति की भयावहता तो यह है कि माफ़िया किंग छोटा राजन के भाई के साथ खुलेआम मोदी ने चुनावी मंच साझा किया। इस घटना का सभी सरगनाओं को संदेश है कि हम तुम्हारे मित्र हैं और तुम हमारे साथ आओ । भारत के इतिहास में प्रधानमंत्री और माफ़िया किंग का यह गठजोड़ बताता है कि मोदी के नेतृत्व में भाजपा सीधे अपराधीकरण को वैधता प्रदान कर रही है। यह एक ऐसा परिवर्तन है जो देश की राजनीति को ‘कोलम्बिया राजनीति ‘ के युग में ले जा रहा है। राजनीतिज्ञों और अपराधी गिरोहों की शिखर के नेता के साथ साँठगाँठ लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा ख़तरा है ।

यह सच है मोदी के नेतृत्व में महाराष्ट्र-हरियाणा में भाजपा जीत गयी है लेकिन किस तरह के तत्वों और राजनेताओं को लेकर जीती है वह ग़ौर करने लायक है। लोकतंत्र में आचरण महत्वपूर्ण होता है । मोदी ने सभी क़िस्म की सभ्य राजनीति के मानक तोड़कर एक खास क़िस्म का मनोविज्ञान रचा है और उस मनोविज्ञान को वे आम जनता के मन में वैधता दिलाना चाहते हैं,इस मनोविज्ञान की धुरी है अपराधी व्यवहारवाद और अवसरवाद। लोकतांत्रिक नीति , मूल्य, परंपरा, हिन्दू संस्कार और मान मर्यादा से इन दोनों तत्वों का कोई लेना देना नहीं है। इस प्रक्रिया में भाजपा का भिन्न चाल-चलन और चरित्र का नारा निरर्थक होकर रह गया है ।

महाराष्ट्र-हरियाणा चुनाव परिणाम यह भी बताते हैं कि कांग्रेस का सांगठनिक ढाँचा पूरी तरह चरमरा गया है, निचले स्तर पर काम करने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं के अभाव में कांग्रेस पार्टी तेज़ी से सामाजिक अलगाव झेल रही है । कांग्रेस की समस्या नेता और नीति की नहीं है बल्कि निस्वार्थ सेवा करने वाले सक्रिय कार्यकर्ताओं की है । सक्रिय कार्यकर्ताओं के अभाव को किसी भी महान नेता की सक्रियता या जादू के जरिए दूर नहीं कर सकते।
हरियाणा और महाराष्ट्र में विगत पाँच सालों में अनेक बडे भ्रष्टाचार के मामले सामने आए लेकिन कांग्रेस ने इन सभी मामलों में भ्रष्टलोगों को बचाने की कोशिश की और इससे कांग्रेस की साख को गहरा धक्का लगा और इन सबका मोदी को सीधे लाभ मिला , इसके अलावा नीतिहीन ढंग से मराठा- जाट आरक्षण करके लोकतंत्र को कांग्रेस नेक्षतिग्रस्त किया । आम जनता को इन दोनों राज्यों में मोदी के अलावा और कोई विकल्प नजर नहीं आ रहा था,फलत: मजबूरी में जनता ने भाजपा को वोट दिया । जबकि तथ्य है कि बहुसंख्यक जनता ने मोदी से इतर दलों को वोट दिया । तक़रीबन 70 फ़ीसदी वोट गैर-भाजपाई दलों को मिला है ।

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