ख़बरों में जाति ढूंढते NDTV पर क्यों न लगे प्रतिबंध?

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ख़बरों में जाति ढूंढते NDTV पर क्यों न लगे प्रतिबंध?
ख़बरों में जाति ढूंढते NDTV पर क्यों न लगे प्रतिबंध?

NDTV विचारधारा की वजह से नहीं, राष्ट्रविरोधी ख़बरों के कारण प्रतिबंधित हुआ है

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-मनीष ठाकुर,पत्रकार-

मनीष ठाकुर
मनीष ठाकुर

आइए, जातिवादी बने, शुतुरमुर्ग बन सर्वोच्च सत्ता को हिला दे। अच्छा! आपके अन्दर का पत्रकार जग गया। अच्छा है ,उसे जगाईए। थोड़ा खुद के अन्दर झांकिए। एक ब्राह्मण अपराधी पकड़ा गया,आप ब्राह्मण है, प्रतिरोध कीजिये। एक दलित अपराधी पकड़ा गया आप दलित हैं प्रतिरोध कीजिये। एक मुसलमान अपराधी गिरफ्तार हुआ आप मुसलमान है हंगामा मचा दीजिये। सत्ता के खिलाफ हंगामा। मत जानिए की अपराधी उसे क्यों कहा जा रहा?उसे गिरफ्तार करने की जरुरत क्यों हुई? आप भी तो पत्रकार हैं इसी समाज का हिस्सा तो एक चैनल को दिन भर के लिए प्रतिबंधित किया गया तो भेड़ चाल में चलना हमारी फितरत है। यह जानते हुए की वह चैनल अपनी विचार धारा की वजह से नहीं राष्ट्र विरोधी हरकत के कारण प्रतिबंधित हुआ है।क्यों नहीं होना चाहिए आपके खिलाफ कार्रवाई? आप खुद पर नियंत्रण रखेंगे नहीं,आपकी एनबीए(टीवी संपादको न्यायिक संगठन) नपुंसक ,मतवाला बन कर सो रही है। तो सरकार क्यों नहीं ले आपके खिलाफ एक्शन। आप क्या दूसरे ग्रह से आये है। जो मर्जी वो करेंगे।

गिरोहबाजी के इस धंधे की काबिलियत क्या है। एक आदमी संपादक है पर फिरौती के केस में अदालत द्वारा प्रथम दृष्टया दोषी है और राष्ट्रवाद का स्वांग रच रहा है। वो दुसरे को पत्रकारिता सिखा रहा है। देश की आम जनता को क्या पता की उसका पत्र्कारिता ल अतित कितना काला है। वो तो बस मोदी की दीवानी है और यह खुद को मोदी भक्त प्रोजेक्ट कर रहा है तो जनता उसके साथ सेल्फी की दीवानी है। एनबीए ने कभी उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नही की? जब की वो पहले भी अपने एक चैनल को काला करवा चूका है। एक एजेंडा धारी जनता की गाली न झेल पाने के कारन सोशल मीडिया से भाग गया। और प्रणय राय के एजेंडे के तहत रोज कांग्रेस और वामपंथ का एजेंडा चला रहा है। वो भी मासूमियत और ईमानदारी का ढोंग रच कर। मोदी विरोधी बस इसी लिए इसके दीवाने है। क्योंकि वो हर खबर को सरकार के विरुद्ध ट्विस्ट कर देता है। हर खबर झूठ फरेब और अपने एजेंडे के तहत तय गेस्ट के माध्यम से पत्रकारिता का बलात्कार करता है। यदि पत्रकारिता करते नहीं एजेंडे का धंधा करते हो तो पत्रकारिता के नाम पर रोते क्यों हो। है हैसियत तो खुद अपनेंगिरेबान में झांको। खुद के अंदर के पापियों को न्यूज रूम से निकाल कर सड़क पर लाओ। से मंच से ढोंग करने वाले पत्रकारिता के कलंक को हीरो बना कर अपनी साख कहाँ बचा पावोगे।

हाँ विरोध के लिए विरोध जिसका कर रहे हो वो तो 14साल से कर ही रहे हो। लगातार उसे ताकतवर बनाते गए। लगातार बना ही रहे हो। तो बनाते रहो। तुम एजेंडे के तहत विरोध के लिए विरोध करते रहोगे और तुम्हारे लोगों के हाथों वो खा जायेगा तुम्हें। क्योंकि सच का सामना आसान नहीं होता। सच तुम्हारे साथ है नहीं। फरेब के बल पर दुश्मन से क्या खाख लड़ोगे।हाँ जातिवाद तो नस नस में है हमारे ।आइये पत्रकारिता के नाम पर पत्रकारिता के अपराध संग हो जायं। आइये शुतुरमुर्ग बन जाये।

(लेखक पत्रकार हैं)



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