यूपी क्या हारना चाहती है भाजपा?

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अम्बरीश कुमार,वरिष्ठ पत्रकार-

एक ज़माने में जनसत्ता का सबसे लोकप्रिय स्तंभ था गपशप .हरिशंकर व्यास इसे संवादाताओं से मिलने वाली जानकारी के आधार पर लिखते थे .हम लोग भी योगदान देते थे .सबसे ज्यादा योगदान होता था ब्यूरो के विवेक सक्सेना का .भीतर की खबर लाने में जवाब नहीं .अब वे अपने साथ शुक्रवार के राजनैतिक संपादक है .शुक्रवार में गाशिप कालम वे ही लिखते है .यूपी पर भाजपा की नई थ्योरी पर उनका पहला पीस जस का तस दे रहा हूं पढ़े.
भाजपा की नयी थ्योरी!

संघ और भाजपा ने तो इस बार सचमुच कमाल कर दिखाया. टिकट वितरण में माल काटने में बहनजी की बसपा को भी पीछे छोड़ दिया. चर्चा है कि औसतन हर टिकट 75 लाख से एक करोड़ रुपये के बीच बिका. पार्टी का शुरू से दावा आ रहा है कि नोटबंदी के कारण किसी को किसी तरह की कोई समस्या नहीं रही. शायद इस वजह से टिकट के नकद खरीदारों की भरमार रही हो. पार्टी ने टिकट वितरण करते समय पुराने नेताओं, कार्यकर्ताओं की जमकर अनदेखी की और परिणाम स्वरूप उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड तक में भारी तादाद में बागी उम्मीदवार मैदान में उतर आये हैं. बताते हैं कि संघ ने पार्टी को आगाह कर दिया है कि इसका असर चुनाव पर पड़ सकता है. मोदी भले ही आंधी की बात कर रहे हों पर पैर पार्टी के ही उखड़ रहे हैं. इसलिए सोशल मीडिया पर एक नया खेल शुरू हो गया है. अब यह थ्योरी बेची जा रही है कि पार्टी खुद उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव नहीं जीतना चाहती है इसलिए उसने टिकट वितरण पर ज्यादा ध्यान ही नहीं दिया.

दलील दी जा रही है कि दो साल बाद लोकसभा चुनाव के साथ ही बाकी कई राज्यों में चुनाव होंगे. मोदी सरकार इसकी तैयार कर रही है. राष्ट्रपति के अभिभाषण में भी यह स्पष्ट कर दिया गया है. चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट भी इसके पक्ष में है. इसलिए अगर अभी राज्य में भाजपा की सरकार बनी तो दो साल बाद उसे सत्ता विरोधी माहौल का सामना करना पड़ेगा. केंद्र सरकार, सांसदों, राज्य सरकार व विधायकों के खिलाफ माहौल बनेगा. इसका भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा. जबकि अभी अगर किसी और दल को सरकार बनती है तो 2019 में विधानसभा और लोकसभा के चुनाव साथ होने से भाजपा को इसका फायदा मिलेगा. भाजपा का मानना है कि इस बार सपा की सरकार बनने जा रही है. उसका डर दिख रहा है. सपा और कांग्रेस मुस्लिम वोट को पूरी तरह अपने साथ कर लेंगे और बसपा हाशिये पर आ जायेगी. इससे अगले लोकसभा चुनाव में उसका दलित वोट भाजपा को मिल जायेगा.

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