तो ये टीवी चैनल्स भारत-पाक युद्ध करवा के ही मानेंगे क्या?

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चैनलों पर युद्ध की ललकार
चैनलों पर युद्ध की ललकार

नदीम एस अख्तर

चैनलों पर युद्ध की ललकार
चैनलों पर युद्ध की ललकार




आपको याद है ना, जब माननीय अटल बिहारी वाजपेयी प्रधानमंत्री थे तब किस तरह भारतीय और पाकिस्तानी सेना आमने-सामने युद्ध के लिए आ खड़े हो गए थे. लग रहा था कि जंग अब हुई और तब हुई. खैर, यूपीए की सरकार आई और फिर सारा माहौल ही बदल गया. तब से अब तक फिर कभी दोनों देश की सेनाएं युद्ध के लिए आमने-सामने नहीं आई हैं.

लेकिन बीजेपी की अगुवाई में नरेंद्र मोदी के आने के साथ ही माहौल फिर बदल रहा है. मीडिया का एक तबका मोदी द्वारा पाकिस्तान को सबक सिखाने की बात करने लगा है. आश्चर्यजनक रूप से इसमें बड़े और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय न्यूज चैनल शामिल हैं. फिजा कुछ ऐसी बनाई जा रही है कि नरेंद्र मोदी पाकिस्तान को “बख्शेंगे” नहीं. इसके लिए नरेंद्र मोदी के उस भाषण का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वो हमारे जवानों के सिर काटकर ले जाएं और हम देखते रहें.??!! डिप्लोमेसी को समझने और चुनावी भाषण में जनता के इमोशंस को जगाने के लिए बोली जाने वाली ऐसी बातों को जानने वाले लोग आपको बता देंगे कि दुनिया कैसे चलती है. अंतरराष्ट्रीय सम्बंध बनाना और बिगाड़ना कोई बच्चों का खेल नहीं होता. क्या आप नहीं समझ पा रहे हैं कि मोदी ने पाकिस्तान के पीएम को शपथ ग्रहण में आने का न्यौता क्यों दिया?? आशंकाएं दोनों तरफ हैं लेकिन अगर भारतीय मीडिया का एक वर्ग अपनी खबरों में युद्ध जैसा माहौल बनाने-दिखाने की कोशिश करने लगे, तो चिंता बढ़ती है. पता नहीं ये कहां से और किसके इशारे पर हो रहा है लेकिन हर सम्पादक जानता है कि पाकिस्तान को सबक सिखाने टाइप जो खबर चल रही है, उसका भारतीय जनमानस पर क्या असर होता है. उससे नफरत ही बढ़ती है, प्यार नहीं. उम्मीद है कि मोदी की ताजपोशी पर जश्न में डूबा मीडिया का एक वर्ग देशहित में ऐसी खबरें चलाने से परहेज करेगा. और ये गलती से भी नहीं हो रहा. एक पैकेज चल गया,

नदीम एस अख्तर
नदीम एस अख्तर

ऐसी बात भी नहीं है. ये लगातार चल रहा है और धड़ल्ले से चल रहा है. उम्मीद करता हूं कि मोदी की कैबिनेट जल्दी बने, देश को नया विदेश मंत्री और सूचना-प्रसारण मंत्री अतिशीघ्र मिले ताकि ऐसी चीजों पर लगाम लगाई जा सके, डंडा चलाया जा सके. फिलहाल तो आपकी यादें ताजी करने के लिए वाजपेयी और मुशर्रर्फ के दौर की उस खबर का लिंक दे रहा हूं, जब सीमा पर दोनों देश की सेनाएं आमने-सामने युद्ध करने के लिए डटी हुईं थीं. ऐसी स्थिति दोबारा ना हो, यही कामना है. http://www.wsws.org/en/articles/2002/06/inpk-j28.html Tense military standoff continues between India and Pakistan – World Socialist Web Site www.wsws.org




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