तारक मेहता का उल्टा चश्मा हँसी, चुटकुले का अद्भुत खजाना

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सुजीत ठमके

tarak mehta ka ulta chashmaजीवन में हँसी नहीं है। चुटकुले नहीं है तब जीवन नीरस लगता है। जीने का मजा किरकिरा हो जाता है। लाइफ बोज लगता है। इंसान निराशा के गर्क में चला जाता है। अमूल्य जीवन जीने की उम्मीद, उमंग खो देता है। वाकई लाइफ खुफसूरत है। और जिंदगी को बेहतर ढंग से जीना भी एक कला है। ऑफिस हो, बिज़नेस हो, घर परिवार हो, अड़ोस पड़ोस का माहौल,निजी जिंदगी में आने वाले तनाव, उतार चढ़ाव हो या दुःख दर्द हरेक के जीवन में कभी ना कभी आना तय है। और यही प्रकृति का नियम है। किन्तु समूचा लाइफ इसी तनाव, उतार चढ़ाव, दुःख दर्द आदि में बाधे रहेंगे तो सारी जिन्दंगी नरक बन जायेगी। हँसी जीवन में ऊर्जा लाती है। जिंदगी बेहतरीन, खूबसूरत बनाने में मदतगार साबित होती है। इसीलिए हरेक के जीवन हँसी,चुटकुले एक अहम हिस्सा है। हँसी,चुटकुले बाँटना में अद्भुत आनंद भी मिलता है। लेकिन यह हँसी जब छोटे परदे के जरिये रोजाना शाम ८:३० बजे २६ देशो में एकसाथ लगती है तब चुटकुले, हँसी का टेम्प्रेचर माइनस डिग्री में चला जाता है। जी हां…. २६ देश….. ११०० से भी ज्यादा एपिसोड, लगातार ५ वर्ष से भी अधिक समय फिर भी टीआरपी रैंकिंग में न.01 . करोडो टीवी के दर्शक। क्या आम….. क्या ख़ास। क्या गरीब। क्या अमीर। क्या मध्यमवर्ग। क्या नौकरीपेशा। क्या व्यापारी, क्या बुजुर्ग। क्या बच्चे। क्या महिला। क्या जवान। और क्या गृहिणी। सभी वर्ग एक कॉमेडी सीरियल के मुरीद है। जी हां …। सही सूना आपने मुरीद है। और वो सीरियल है ” तारक मेहता का उल्टा चश्मा “…… जी हां। यह साधारण बात नहीं है। लगातार ५ वर्षो के बाद भी हर एपिसोड में नयापन, नया कंटेंट और २६ देशो के घरो में एक साथ ठहाकों की एकसाथ मैफल। कई टीवी चैनल में कई कॉमेडी सीरियल आये कुछ महीने रहे और चले गए। दर्शको ने कुछ महीने ने बाद ऐसे कॉमेडी सीरियलों से मुह फेर लिया। तारक मेहता का उल्टा चश्मा में ना अश्लीलता है ना ही गिरते स्तर कॉमेडी। इसीलिए सभी परिवार एक साथ इस शो को बैठकर देखता है।

तारक मेहता का उल्टा चश्मा छोटे परदे पर आने के पीछे की कहानी भी बड़ी रोचक, दिलचस्प है। निर्माता असितकुमार मोदी तब पुणे में छोटे से प्रोडक्शन हाउस में काम करते थे। एक दिन एक अखबार में गुजरात बड़ोदरा के चर्चित कॉमेडी नॉवेलिस्ट के बारे में खबर छपी। एक गुजराती साप्ताहिक में तारक मेहता नामक युवा कॉलमिस्ट ” दुनिया ने ऊंधा चश्मा”…। नामक कॉमेडी कलम लिखते है और गुजराती लोग उसे काफी दिलचस्पी से पढ़ते है। एक दिन निर्माता असितकुमार मोदी ने जुगाड़ लगाकर नॉवेलिस्ट के घर सुबह ७:०० बजे फोन न. लिया और फोन किया। निर्माता असितकुमार मोदी ने कहा तारक भाई मै इसपर कॉमेडी सीरियल बनाना चाहता हु। तारक मेहता को लगा दिन में हजारो फोन आते रहते है। शायद किसी ने मजाक में यह फोन किया है। एक दिन निर्माता असितकुमार मोदी ने पुणे रेलवे स्टेशन से बड़ोदरा की ट्रेन पकड़ी और सुबह सुबह लेखक के घर पहुंच गए। निर्माता असितकुमार मोदी ने कहा मुझे इसपर कॉमेडी सीरियल बनाना है तब तारक मेहता को सारी बाते मजाक लगी। असितकुमार मोदी ने ” दुनिया ने ऊंधा चश्मा”… लिखे हुए सारे लेख इकठ्ठा किया और पुणे लौटे। चुकी तारक मेहता का उल्टा चश्मा में सब टीवी पर परोसे जा रहे सीरियल में काफी बदलाव किये गए। असितकुमार मोदी ने स्क्रिप्ट लिखना शुरू कर दिया। कुछ महीने में ही स्क्रिप्ट तैयार हुई। असितकुमार मोदी स्क्रिप्ट लेकर कई प्रोडक्शन हाउस, टीवी चैनल्स, बड़े डायरेक्टर, प्रोड्यूसर के पास गए। सभी ने स्क्रिप्ट बकवास है टीवी के दर्शक पसंद नहीं करेंगे यह कहते हुए असितकुमार मोदी को बाहर का रास्ता दिखाया। किन्तु असितकुमार मोदी को खुद के स्क्रिप्ट पर यकींन, विश्वास था। आखिरी इलाज करके सब टीवी के पास गए। जब खुद पर यकींन हो तब कोशिश भी रंग लाती है। असितकुमार मोदी के प्रपोजल को सब टीवी वालो ने तुरंत स्वीकार किया। और तारक मेहता का उल्टा की शूटिंग शुरू हुई मुंबई के गोरेगाव स्थित फिल्म सिटी में। जी…. हां…. गोकुलघाम सोसायटी। आम तौर पर किसी भी सोसायटी में सभी जात, धर्म, प्रदेश, वर्ग के लोग रहते है। दरअसल तारक मेहता का उल्टा सर्वधर्म समभाव की अद्भुत मिसाल भी है। इस कॉमेडी सीरियल में जेठालाल गड़ा है गुजराती फैमिली से है। मराठी भिड़े की फैमिली है। सोढ़ी की पंजाबी सिख फैमिली है। हाथी का नार्थ इंडियन परिवार। और उनकी पारसी बीवी है। तमिल से अय्यर और बंगाली बीवी बबिता है। भोपाल से तालुख रखने वाले पोपटलाल पत्रकार है। तारक मेहता और अंजलि भाभी है। बुजुर्ग चम्पक चाचा है। मुस्लिम करेक्टर अब्दुल है। सपोर्टिंग केरेक्टर में बाघा है, नट्टू काका, सुन्दर है। बावरी है। और टप्पू सेना की मस्ती भरी बदमाश कंपनी है। एक सोसायटी ने आमतौर पर अलग अलग प्रोफेशन से जुड़े लोग रहते है। गोकुलघाम सोसायटी में भी ठीक ऐसा ही है। जेठालाल इलेक्ट्रॉनिक्स सामानो के गुजराती व्यापारी है। भिड़े घर गृहस्ती चलाने के लिए टूशन लेते है। बीवी आचार पापड़ का बिजनेस करती है। तारक भाई लेखक है जो शो की बेहतरीन एंकरिंग भी करते है। अय्यर सायंटिस्ट है। हाथी डॉक्टर है। सोढ़ी छोटे मोठे काम करता है। पत्रकार पोपटलाल शादी के लिए लालाईत है। अब्दुल का छोटा का दूकान है। टप्पू सेना की धमाल है। चम्पक चाचा का बेटे को प्यार से डाटना भी है। अबे जेठ्या बबुचक इतने देर से क्यों उठता है ? और जेठालाल की विनम्रता से कहना बाबूजी रात देर से सोया। जेठालाल, बीवी दया से काफी प्यार करता है। बावजूद जैसे आमजीवन में कोई और भी पसंद रहता है। जेठालाल का दिल भी बबिता पर है। जेठालाल का आशिकाना अंदाज, दिलफेक अदा दर्शको को काफी भाता है। बाघा, अब्दुल, बावरी, नट्टू, चम्पक चाचा, टप्पू सेना की मस्ती तारक मेहता का उल्टा चश्मा की यूएसपी है। जेठालाल को धेपला, फापड़ा,जेलाबी यह गुजराती व्यजन काफी पसंद है। पल पल ठहाके, हँसी, चुटकुले तो कभी गंभीर माहौल बना रहता है। बावजूद हँसी में पल भर की भी कमी नहीं है। कम पढ़े लिखे जेठालाल, दयाभाभी का प्रॉब्लम शब्द को पॉब्लम उच्चारण, सायंटिस्ट को सायनीस कहना मानो हिंगलिश विंग्लिश का अनोखा मेल है। क्या दिवाली। क्या दसहरा। क्या होली। क्या ईद। क्या १५ अगस्त। क्या २६ जनवरी। क्या नया वर्ष। क्या गणपति फेस्टिवल। क्या दुर्गा फेस्टिवल। क्या रावण दहन। क्या गेट टू गेदर। तारक मेहता का उल्टा चश्मा में सभी धर्म सम्प्रदाय के त्यौहार भी शान से मनाते है। वाकई तारक मेहता का उल्टा चश्मा हँसी, चुटकुले का अद्भुत खजाना। इसीलिए कोई सीरियल, फिल्म का प्रोमोशन हो सिलिब्रेटी तारक मेहता का उल्टा चश्मा का टाइम स्लॉट जरूर मांगते है।

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