एक रवीश गए, कई रवीश निजता पर चोट करने के लिए पैदा

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ravish kumar prime time anchor

रवीश कुमार सोशल मीडिया से गायब क्या हुए कि उनके क्लोन बनने तैयार हो गए. मामला बड़ा मजेदार है. रवीश कुमार के ट्विटर से गायब होते ही एक नए रवीश ने जन्म भी ले लिया है. प्रोफाइल तैयार है और टीका – टिप्पणी भी चालू है. कई पाठक इसे असली रवीश समझ धोखे से रवीश क्लोन के प्रोफाइल पर टिप्पणी भी कर देते हैं . लेकिन जल्द ही उन्हें अपनी गलती का एहसास होता है कि अरे ये तो रवीश का नकली प्रोफाइल है. असली प्रोफाइल तो गायब है. लेकिन ऐसा नहीं है कि नकली रवीश प्रोफाइल वाले सज्जन कोई धोखा देने का इरादा रखते हैं. दरअसल वे धोखा नहीं बल्कि रवीश के प्रोफाइल (नकली) से ही रवीश के मान – मर्दन का इरादा रखते हैं. रवीश कुमार @ravishndtv के प्रोफाइल में तस्वीर के साथ – साथ साफ़ – साफ़ लिखा हुआ है –

“Ravish Kumar @ravisndtv

Offcial parody account of RavishNDTV..बिकना शौक है!घोर बाजारू !ठीक से नहीं आती अंग्रेजी इसलिए NDTV और कांग्रेसके आधे अंग्रेजोके तलवे चाटता हु!पीला पत्रकार !

स्थान :सोनिया माई के चरण. ”

यानी रवीश कुमार के नाम से प्रोफाइल बनाकर रवीश की फजीहत की भरपूर कोशिश ट्विटर के इस एकाउंट से की गयी है. साफ़ है कि एकाउंट बनाने वाले सज्जन रवीश के प्रति बदनीयती रखते हैं और उनके तर्कों से इस कदर असहमत हैं कि उन्हें पीला पत्रकार तक कहने से नहीं चूक रहे. लेकिन कोई इस फर्जी प्रोफाइल वाले से पूछे कि रवीश कुमार ने अबतक पीला पत्रकार वाला कौन सा काम किया है? अब यदि ‘रवीश की रिपोर्ट’ और ‘प्राइम टाइम’ जैसे कार्यक्रमों को करने के कारण कोई पीला पत्रकार है तो तमाम पत्रकार पीला पत्रकार बनना चाहेंगे.

मीडिया मामलों के विशेषज्ञ ‘विनीत कुमार’ इस फर्जी प्रोफाइल और रवीश के सोशल मीडिया से गायब होने के प्रकरण पर टिप्पणी करते हुए लिखते हैं कि रवीश जैसे कुछ चेहरे टीवी में बचे हैं तो टीवी से उम्मीद भी बची है. नहीं तो अंदरखाने की बात तो हम सब जानते हैं. जिस घटिया तरीके से इन्ट्रोड्यूस करके प्रोफाइल बनायी है, अफसोस की बात है..दक्षिणपंथी ताकतों का विरोध करना कांग्रेसी हो जाना कैसे हैं, समझ नहीं आ रहा..असहमति के सम्मान की क्षमता खो देने से समाज का जो रुप उभरता है, उसका एक नमूना ये अकाउंट भी है. हम सब आशुतोष,पुण्य प्रसून,राजदीप सरदेसाई,बरखा दत्त से समय-समय पर असहमत होते रहे हैं. इसी तरह से कुछ लोग रवीश से भी असहमत हुए होंगे लेकिन इसका मतलब ये बिल्कुल भी नहीं है कि हम इन सबों के नाम से फेक अकाउंट बनाएं और वो सारी बातें लिखें जिसके पीछे कोई प्रमाण नहीं है. ये आलोचना और असहमति नहीं हद दर्जे की नीचता है और रवीश ही क्यों मैं किसी के नाम से भी इस तरह के अकाउंट बनाए जाने, उनकी तस्वीर का इस्तेमाल किए जाने के प्रति अपनी गहरी असहमति दर्ज करता हूं.  हम सब समय-समय पर सोशल साइट्स से थोड़े वक्त के लिए गायब होते रहे हैं और कभी भी उसकी वजह सार्वजनिक नहीं की..हम मानकर चलते हैं कि ऐसा करना मेरा निजी फैसला है..फिर एक टीवी पत्रकार के चले जाने को लेकर इस तरह की अफवाहों को हवा देना,उसके पीठ पीछे फर्जी अकाउंट बनाकर नीचता पर उतर आना किस हिसाब से सही है ? क्या हम टीवी पत्रकार या किसी ऐसे मशहूर शख्स को थोड़े वक्त के लिए कॉमिक रिलीफ का मौका देना नहीं चाहते..ये माध्यम अब चाहे जितना भी प्रोफेशनल और हार्डकोर इश्यू की तरफ शिफ्ट होता चला जाए लेकिन अपने बुनियादी स्वरुप में तो व्यक्तिगत इच्छा और सोच पर ही टिका है न ? किसी की नौकरी बजानेवाली जबरदस्ती तो नहीं है न..फिर हम क्यों रवीश के जाने पर इस तरह से एक फर्जी अकाउंट बनाकर कोडे बरसाने का काम कर रहे हैं ? मेरे ख्याल से ये निजता पर वेवजह चोट करना है.

 

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