रेडियो मिर्ची की मुहिम महिलाओं की आजादी पर अघोषित कर्फ्यू क्यों ?

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नई दिल्ली । एनबीटी और रेडि़यों मिर्ची द्वारा गत दिनों जापानी पार्क पर धावा बोल दो अभियान के बाद अगला कदम बाजार को सुरक्षित बनाने के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क को मुख्य रूप से फोकस किया गया था । उसी मुहिम के अन्तर्गत हजारों की तादाद में दूरदराज से चलकर उक्त मुहिम में शामिल होने के लिए हर उम्र के जागरूक लोगों ने शिरकत की ।

इस अवसर पर अस्मिता थिएटर ग्रुप ने अपने वहीं अन्दाज के साथ ‘ आओ – आओ नाटक देखों ‘ नाटक दस्तक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। जिसमें भारतीय समाजकी नग्न विकृति के खिलाफ समझाईस की गई । दर्शको को उनका यह अन्दाज खूब भाया । इस मुहिम के साथ आरंभ से ही जुड़ी एड़वोकेट लूत्थरा ने भी अपना समर्थन देने के लिए चलकर यहां आई । दिल्ली के पार्को और बाजारों को भयमुक्त बनाने के लिए बीए मास कम्यूनिकेशन विषय के द्धितीय वर्ष के छात्र शौकत अली ने अपनी भागीदारी व्यक्त की । उन्हों ने बताया कि वो स्वयं मयूक जोशी के नेतृत्व में नौजवान क्रान्तिदल ( नौक्रान्द ) थिएटर ग्रुफ से जुड़ें हैं। कई प्ले में भाग ले चुकें हैं ।


फ्लेवर ऑफ  चाईना में कार्यरत सुरज मुखियां सन / ऑफ भन्नु मुखियां कहना हैं कि पिछले 7 – 8 वर्षो से यहां काम करता हूँ, जब भी फुर्सत मिलती हैं तो पार्क में आ जाता हूँ । एनबीटी और रेडि़यों मिर्ची द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए आया हूँ । पालिका बाजार और उपरवाला पार्क सबसे ज्यादा अन सैफ हैं । वहां स्मेकियों का अड्ड़ा बना हुआ हैं। वहां सेंटल पार्क की तरह कोई सुरक्षाव्यस्था नहीं होने के कारण युवतियां, महिलाएं ही नहीं आम व्यक्ति भयभीत रहता हैं । आये दिन घटनाएं होती रहती है। पालिका पार्क का यह हाल हैं कि वहां आने वाले व्यक्तियों के कभी पर्स, तो कभी बैग इत्यादि स्मेंकिया द्वारा उठा कर ले जातें हैं नजर चुकी सामान गायब हो जाता हैं । पुलिस को रिर्पोट क्यों नहीं करने के सवाल पर उस का कहना था कि कौन पुलिस के चक्कर में पड़ें । जब आम आदमी भयभीत हैं इन स्मेंकियों से तो महिलाएं कैसे भयमुक्त हो कर आजा सकती हैं । मैं भी इसी अभियान को सपोर्ट करने आया हूँ ताकि दिल्ली के पार्क बाजार भी भयमुक्त हो ।

नुक्कड़ नाटक के बाद एनबीटी और रेडि़यों मिर्ची टीम तथा अस्मिता थिएटर की ग्रुप लीड़र मारवा सहित हजारों दर्शकों ने मार्च निकाला जिस की थीम ‘ दिल्ली मेरी हैं । ‘ इसी के साथ ‘ लेट काम करके आगे बढ़ने का हक मेरा भी है । अपने शहर में बेधड़क जीना मेरा अधिकासर हैं ‘ जैसे स्लोगन और तखतियां हाथ में लिए मार्च आयोजित किया गया । उक्त मार्च ने हमारी दिल्ली में महिलाओं की आजादी पर अघोषित कर्फ्यू क्यों ? देर रात कहीं जाना बसों, ऑटो और टैक्सी में सफर करने से कतराना, यह सब एक बात बन गई है, लेकिन अब समय आगया है, यह सब बदलने का , आओ अपनी दिल्ली पर अपना हक जताओं, ताकि हर लड़की अब दिल्ली में पूरी आजादी से, बेधड़क रह सके , घूम सके के निहित दस्तक नाटक सन्देश ने उपस्थित दर्शकगणों के दिल दीमाग को झकझोडा, आलोडि़त किया । वही इसी मिशन को सार्थक बना दिया । इसी की सार्थकता तब हैं जब इसे आगे बढ़ाए ! हमने तो कर दिया क्या आप भी तैयार हैं !

{ सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया नई दिल्ली } ।

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