पत्रकार होने के लिए जरुरी नहीं कि कोई मसीहा होने का पाखंड रचे #SuperJournalistSPSingh

0
2108
SP SINGH, JOURNALIST
SP SINGH, JOURNALIST

एसपी सिंह की पुण्यतिथि पर विशेष :

एक बेहतर समाज की कल्पना एक पेशेवर पत्रकार होकर भी की जा सकती है. शोषित,दबे-कुचले और हाशिए के समाज की बात उसी न्यूजरुम के भीतर से की जा सकती है जहां से मीडिया संस्थान की बैलेंस शीट दुरुस्त होती है.

जरुरी नहीं कि बेहतर समाज के नाम पर कोई पत्रकार मसीहा का, देशभक्त का, प्रवक्ता का अतिरिक्त चोला ओढकर किसी अखाडे में जम जाए. न्यूजरुम को यज्ञशाला में तब्दील करने का नकली उपक्रम रचे. पाठक/दर्शक को जागरुक नागरिक के नाम पर पाखंडी और मॉब में तब्दील कर दे.

एक पेशेवर पत्रकार की पक्षधरता बिल्कुल स्पष्ट होती है- अपना अस्तित्व बचाए रखने, जीने के लिए जरुरत भर के संसाधन और समाज की जरुरत के अनुसार पत्रकारिता. उसका काम सिर्फ रिपोर्ट नत्थी करना भर नहीं, रिपोर्ट के माध्यम से समाज को और ज्यादा मानवीय और संवेदनशील बनाना है.

इस अर्थ में टीवी ग्लैमर का नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी और जवाबदेही का माध्यम है. इस टीवी और चैनलों के प्रभाव से यदि नागरिक और लोकतंत्र कमजोर होने लग जाए और मीडियाकर्मी ताकतवर महसूस करने लगें तो समझिए एस पी सिंह की पत्रकारिता की मौत हो गयी है.

एस पी सिंह की पत्रकारिता से गुजरते हुए हमने यहीं सीखा, समझा. उसी के आसपास करने की कोशिश करते हैं, करते रहेंगे. आज जरुरत इस बात की ज्यादा है कि हम उस पत्रकारिता को कितना बचा पाते है ?

नमन
#superjournalistSPSingh

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

5 + 6 =