पी7 के दगाबाज आंदोलनकारियों ने अपनों का ही हक मारा!

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P7 न्यूज की ऐतिहासिक Breaking News! सैलेरी विवाद के चलते P7 न्यूज बंद
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पी7 के आन्दोलनकारी ही निकले धोखेबाज, फिर शुरू हुआ आन्दोलन

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पिछले दिनों ये खबर आई थी कि आंदोलनकारी पत्रकारों के जिद और जुनून के आगे पी7 प्रबंधन झुक गया और उन्हें नवंबर तक की सैलरी दे दी गयी. साथ ही 15 जनवरी तक तीन महीने का कम्पनसेशन भी दे दिया जाएगा. इस खबर को सुनकर पी7 के सभी कर्मचारी/श्रमिक ख़ुशी से झूम उठे, लेकिन इनकी ख़ुशी में तब विराम लग गया जब इन्हें पता चला कि पी7 के सभी कर्मचारियों को नहीं बल्कि केवल 450 में से केवल 153(लगभग) लोगों को ही ये सुविधा मिलेगी.

दरअसल ये सभी सुविधाएँ सिर्फ उन कर्मचारियों को मिल रही थी जिसपर इस आन्दोलन के नेता मुकुंद शाही मेहरबान थे. यहाँ जिनलोगों ने मुकुंद शाही के चाटुकारिता की उनको जी सर, जी सर बोला सिर्फ उन्ही की लिस्ट बना कर मुकुंद शाही ने पी7 प्रबंधन को दे दिया. प्रबंधन को जैसे बिन मांगी मुराद मिल गयी और उसने तुरंत हामी भर दी. मतलब यहाँ साफ़ है कि मुकुंद शाही ने पत्रकारिता को कलंकित करते हुए अपने ही दोस्तों को धोखा दिया जो उनके साथ शुरुआत से कंधा-से-कंधा मिला कर खड़े थे.

इसके बाद, दूसरे ही दिन अन्य कर्मचारियों ने तत्काल बैठक बुलाई और सब एकत्रित हो कर दुबारा बड़ी संख्यां में लेबर कमिश्नर के पास नयी कंप्लेन दायर कर आये. इसबार इन कर्मचारियों का कहना है कि हम किसी गुटबाजी में नहीं फंसेंगे और पी7 के हर एक कर्मचारी/श्रमिक को उसका अधिकार जबतक नहीं मिलेगा तबतक हम लड़ते रहेंगे. उनके साथ ऐसे भी लोग खड़े हैं जिनकी सैलरी आठ से बारह हज़ार के बीच है जिसके लिए मुकुंद शाही प्रबंधन पर कोई दबाव तक नहीं डाले. उन्होंने बस अपना और अपने चाटुकारों की सलेरी सेटल करवा ली.

पी7 के कुछ पियोन और ड्राइवरों का कहना है कि अगर वो सच में आन्दोलनकारी थे और कर्मचारियों के लिए लड़ रहे थे तो कम -से- कम हम गरीबों का भी तो सेटलमेंट करवा देते. उन्होंने तो लाखों वालों की सेलरी की सेटेलमेंट करवा के निकल लिए. मुकुंद शाही पर प्रबंधन से सांठ-गाँठ का भी आरोप लग रहा है. अब आन्दोलनकारी इस बार प्रबंधन को बख्शने के मूड में बिलकुल नहीं हैं. क्यूंकि कल लेबर कमिश्नर के यहाँ कंप्लेन देते ही वहां से पी7 के निदेशक केसर सिंह, शरद दत्त और एच आर हेड विदु शेखर के खिलाफ नोटिस इश्यू कर दिया है. सिटी मजिस्ट्रेट से भी इन्हें पूर्ण सहयोग का आश्वासन मिला है. इसके साथ ये राज्य सरकार और केंद्र सरकार के सम्बंधित मंत्रालयों को भी पत्र के माध्यम से चैनल की हरकतों की सूचना देते हुए कारवाई की मांग की है. इतना ही नहीं, कानूनी कारवाई के साथ-साथ ये धरना की भी तैयारी कर रहे हैं. इसबार ये सिर्फ पी7 के ऑफिस में ही नहीं बल्कि कंपनी के नोयडा सेक्टर 19 के ऑफिस और निदेशक केसर सिंह के घर के बाहर भी एक साथ धरना पर बैठेंगे. अगर बात फिर भी नहीं बनी तो ये भूख हड़ताल पर जायेंगे चाहे इनकी जान ही क्यूँ न चली जाए, लेकिन पी7 के एक-एक कर्मचारी/श्रमिक का पैसा वापस दिलवाएंगे.

(पी7 के भुक्तभोगी पत्रकार)

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