बात-बात पर मुसलमान-मुसलमान का राग अलापना बंद कीजिए

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ताल ठोक में रोहित सरदाना
ताल ठोक में रोहित सरदाना

-अजय प्रकाश-




ताल ठोक में रोहित सरदाना
ताल ठोक में रोहित सरदाना

4 दिन पहले जिन 40 लोगों को मारा गया, उनकी जाति क्या थी, उनका धर्म क्या था और उनको मारने की मॉडस आपरेंडी क्या थी? क्या हिंदू और मूलवासी होने के नाते उनके साथ नृशंसता कम बरती गयी? कोई ख्याल किया गया? क्या उनके मानवाधिकार की रक्षा हुई या उनको फर्जी मुठभेड़ में नहीं मारा गया। इसी कथित इनकाउंटर में 12 लोग गायब हैं, उनकी जाति पता की?

नहीं न। तो पता कीजिए और बात—बात पर मुसलमान—मुसलमान का राग अलापना बंद कीजिए। बस एक मामूली जानकारी ले लीजिए कि जिन 40 लोगों को मारा गया उन्हें पहले खाने में जहर दिया गया, फिर गोली मारी गयी।

इसलिए सत्ता के दमनकारी चरित्र को हिंदू—मुसलमान के बीच में बांटने वाले भी इस मुल्क की जनता की व्यापक एकता के उतने ही बड़े दुश्मन हैं जिनते हिंदूवादी और मुस्लिम कट्टरपंथी।

क्या असल लड़ाई सत्ता की दमनकारी नीति के खिलाफ नहीं होनी चाहिए, एक नागरिक अधिकार की तरह नहीं होनी चाहिए, बजाए कि आप यह माहौल बनाएं कि मुसलमान था, इसलिए ठोक दिया।

(अजय प्रकाश के फेसबुक वॉल से)




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