हाई कोर्ट में मोदी सरकार: बहुसंख्यक संप्रदाय मंत्रालय की जरुरत नहीं

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इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच में अल्पसंख्यक मंत्रालय की तर्ज पर बहुसंख्यक संप्रदाय मंत्रालय बनाने हेतु सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा दायर याचिका में भारत सरकार ने कहा है कि बहुसंख्यक समुदाय के लिए अलग मंत्रालय की कोई जरुरत नहीं है.

ए पी सिंह, अनुसचिव, सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामा में कहा गया है कि हिन्दुओं के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा रहा है और अल्पसंख्यक मंत्रालय के गठन को हिन्दुओं के साथ दोहरा व्यवहार नहीं माना जा सकता.

सरकार ने कहा है कि अल्पसंख्यक मंत्रालय संविधान के अनुच्छेद 29 के तहत अल्पसंख्यकों के हितों की रक्षा के लिए बनाया गया है जिसमे विशिष्ट भाषा, लिपि वाले सभी लोग आते हैं. साथ ही मात्र धर्म के आधार पर कई प्रकार की योजनायें और कार्य किये जाने की बात अस्वीकार की गयी है.

याचिका में डॉ ठाकुर ने कहा था कि अनुच्छेद 15(1) मात्र धर्म के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह निषिद्ध करता है लेकिन मात्र धर्म के आधार पर अल्पसंख्यक मंत्रालय बनाए गए हैं जिसमे कई विशेष योजनायें चलाई जा रही गयीं, जिससे बहुसंख्यक समुदाय के लोग वंचित हैं.

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