नोटबंदी को लेकर नरेंद्र मोदी को मौलिक भारत की सलाह

देश में लगभग सभी राजनीतिक दल परोक्ष रूप से वार रूम एवं कॉल सेंटर के माध्यम से सोशल मीडिया पर एक दूसरे के खिलाफ प्रचार अभियान छेड़े रहते हें। इनके द्वारा जारी की गयी प्रचार सामग्री अक्सर भ्रांतिपूर्ण और भय/ भ्रम फैलाने वाली होती है। इन काल सेंटरो और वॉर रूम का न तो कोई ज्ञात वित्तीय श्रोत ही, न ही कोई पंजीयन होता है और न ही इनके द्वारा जारी पोस्ट/ सामग्री की वैधता का परीक्षण। इसी कारण नोटबंदी और अन्य महत्व के मुद्दों पर समाज और सरकार को परेशानियो का सामना करना पड़ता है। इन वार रूम एवं काल सेंटरो के वेधनिकरण के लिए तुरंत निर्देश दिए जाएं।

प्रतिष्ठा में,
श्री नरेंद्र मोदी जी
माननीय प्रधानमंत्री
भारत सरकार
नई दिल्ली – 110001

बिषय : सरकार द्वारा 500 और 1000 की करेंसी के विमुद्रीकरण के उद्देश्यों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतू कुछ और सुझाव / प्रतिवेदन

माननीय महोदय,

आपकी सरकार द्वारा उपरोक्त फैसले को तीव्र गति से लागू किये जाने के लिए उठाये गए कदमों और हमारी मौलिक भारत संस्था द्वारा दिए गए अनेक सुझावों को मानने का आभार। महोदय, उपरोक्त प्रक्रिया के प्रभावी क्रियान्वयन में अनेकोनेक बाधाएं आ रही हें। हमारी संस्था मौलिक भारत के जमीनी सर्वेक्षणों के उपरांत निम्न और सुझाव तुरंत कार्यवाही हेतू प्रेषित हें –

1) देश में लगभग सभी राजनीतिक दल परोक्ष रूप से वार रूम एवं कॉल सेंटर के माध्यम से सोशल मीडिया पर एक दूसरे के खिलाफ प्रचार अभियान छेड़े रहते हें। इनके द्वारा जारी की गयी प्रचार सामग्री अक्सर भ्रांतिपूर्ण और भय/ भ्रम फैलाने वाली होती है। इन काल सेंटरो और वॉर रूम का न तो कोई ज्ञात वित्तीय श्रोत ही, न ही कोई पंजीयन होता है और न ही इनके द्वारा जारी पोस्ट/ सामग्री की वैधता का परीक्षण। इसी कारण नोटबंदी और अन्य महत्व के मुद्दों पर समाज और सरकार को परेशानियो का सामना करना पड़ता है। इन वार रूम एवं काल सेंटरो के वेधनिकरण के लिए तुरंत निर्देश दिए जाएं।

2) देश में बड़े नोटों की वापसी के बाद नेता, नोकरशाह, न्यायपालिका, सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस से जुड़े लोग, समूह क, ख, ग के केंद्र एवं राज्यों के अधिकारी लगातार ज्वेलर्स, हवाला कारोबारियों, आयातकों, निर्यातकों, बड़े किसानों, पेट्रोल पंप मालिकों, बिल्डर्स और बड़े उद्योगपतियों एवं व्यापारियों के माध्यम से अपने काले धन को सफ़ेद कर रहे हें किंतू सरकार से जुड़े किसी भी अधिकारी के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। जिन भी गैर सरकारी लोगों की खिलाफ कर अधिकारी कार्यवाही कर रहे हें वहां मोटी रिश्वत लेकर मामले को रफा दफा किया जा रहा है। इस कारण आम जनता में गहरा असंतोष है। यह भी सार्वजनिक किया जाए कि जो भी लोग मोटे कमीशन पर पुराने नोट ले रहे हें उसे कैसे बेंको में समायोजित करा पा रहे हें और नई करेंसी ले पाने के लिए आश्वस्त हें। इस सिंडीकेट पर कडी कानूनी कार्यवाही आवश्यक है। बेंको द्वारा बड़ी मात्रा में नकली करेंसी स्वीकार की जा रही है , इस पर रोक लगायी जाए।

3) देश में जी एस टी के साथ ही आयकर आदि अन्य कर सुधारों को लागू करने की स्पष्ट कार्ययोजना तुरंत जारी की जाए। यदि संभव हो सके तो इसे जनवरी 2017 से ही लागू किया जाए ताकि लोगों में फैले भ्रम और अनिश्चितता दूर हो सके। रूपये पांच लाख तक की आय आयकर से मुक्त रखी जाए और उसके बाद दस लाख की आय तक 5% , बीस लाख तक 10% और उससे ऊपर कर की दर 15% तक ही रहनी चाहिए।

4) देश में सभी प्रकार के छोटे-बड़े कृषि, सेवा, व्यपार,उद्योग का पंजीकरण तुरंत अनिवार्य होना चाहिए, साथ उनको रु 1000 से ऊपर के लेन देन को ऑन लाइन/ इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से करना अनिवार्य होना चाहिये। जो लोग पुर्णतः/अधिकांशतः नकद में काम करते रहे हें और वो जो अनाधिकृत स्थानों से अपने कार्यो का संचालन कर रहे हें, उन्हें क़ानूनी प्रक्रिया अपनाने हेतू पर्याप्त समय देना चाहिये और उनसे सहानुभूति पूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए क्योकि उनको सरकारी अमले ने ऐसा करने देने में भरपूर सहयोग देकर अपनी जिम्मेदारियो से पल्ला झाड़ता रहा है।

5) प्राथमिकता के आधार पर 10 लाख से कम आबादी वाले शहरों, कस्बों और गाँवो के बेंको , एटीम, डाकघरों आदि में नई करेंसी की उपलब्धता बढ़ायी जाए क्योकि देश की 80% से अधिक आबादी यही रहती है और बड़े शहरो के अनुपात में उन्हें काफी कम नई करेंसी मिल पा रही है।
6) देश में नोट वापसी के उपरांत जिन जिन क्षेत्रों में उत्पादन, बिक्री और रोजगार के संकट आये हें उसका अध्ययन करने के लिए बिशेष कार्यबल का गठन हो और उसकी सिफारिशों को तुरंत लागू किया जाये।
7) सरकारी खर्च पर चुनाव, एक साथ लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव सरकारी खर्च पर कराने की व्यवस्था हेतू तुरंत कानून बने और राजनितिक दलों को नकद चंदे और लेनदेन पर पाबंदी की व्यवस्था की जाये।
8) बेंको द्वारा दिए गए बड़े ऋणों जिनकी वापसी नहीं हो पा रही है की असफलता की जबाबदेही सरकार नहीं तय कर रही है इससे जनता निराश है। इस दिशा में प्रभावी कार्यवाही और आगे ऐसा न हो सके इसके उपायो की घोषणा की जाए।
9) देश में कारपोरेट गवर्नेंस के सरकारी मानक तय हों और इन्हें पारदर्शी बनाया जाए साथ ही इनके प्रभावी अनुपालन की व्यवस्था सार्वजनिक की जाए।
10) देश में सभी प्रकार का नकद आयात और निर्यात पुर्णतः अवैध घोषित हो और हवाला कारोबार करना राष्ट्रद्रोह घोषित हो।

प्रति प्रेषित : वित्तमंत्री एवं वित्त राज्य मंत्री, भारत सरकार
दिनांक : 1 दिसबर, 2016

धन्यवाद।
भवदीय
अनुज अग्रवाल,महासचिव,
नीरज सक्सेना, ट्रस्टी
मौलिक भारत
A -74, सेक्टर 2, नोयडा
गौतमबुध नगर (उत्तर प्रदेश)

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