शोभना भरतिया ने शशिशेखर को झिड़क कर कहा,हमें ऑफिस आना अच्छा लगता है,कोर्ट के चक्कर काटना नहीं

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मजीठिया नहीं देंगे, जेल जाने को तैयार!

मजीठिया वेज बोर्ड पर सुप्रीम कोर्ट ने स्थिति स्पष्ट कर दी है, लेकिन कुछ अखबार मालिक ऊहापोह में हैं। उनकी समझ में नहीं आ रहा है कि किस प्रकार कर्मचारियों का हक मारा जाए और करोड़ों रुपये बचाए जा सकें। एक तरफ मालिकों के सलाहकार कानून से खेलने के नए-नए रास्ते सुझा रहे हैं तो दूसरी तरफ कर्मचारियों में भय पैदा किया जा रहा है कि वे चुपचाप प्रबंधन के फैसले को स्वीकार कर लें और बंधुआ मजदूर बने रहें। यह स्थिति मुख्य तौर पर हिंदी के बड़े अखबारों दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी में है। दैनिक जागरण ने पंजाब में हस्ताक्षर अभियान चला रखा है। इसके जरिये पंजाबी जागरण में स्टाफ रिपोर्टरों तक को शौकिया पत्रकार बनाया जा चुका है।

आपको बता दें कि हस्ताक्षर कराए जाने के बावजूद यदि कोई सुप्रीम कोर्ट या किसी भी कोर्ट जाता है तो हस्ताक्षर स्वत: अमान्य हो जाएगा। शायद यही वजह है कि जालंधर और लुधियाना में दैनिक जागरण के कई कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर ली है। जागरण की ही इलाहाबाद यूनिट से सूचना है कि वहां भी कुछ लोग सुप्रीम कोर्ट जाने के लिए एकजुट हो गए हैं। जागरण के रांची, पटना और कानपुर के कई कर्मचारियों ने सुप्रीम कोर्ट जाने की इच्छा जताई है और मजीठिया मंच से मदद की गुहार लगाई है। भास्कर के हिसार, भोपाल और जयपुर और इसी समूह के दिव्य भास्कर (गुजरात) के कई कर्मचारियों में भी मालिकों की मनमानी पर आक्रोश चरम पर है। उन्होंने भी एकजुट होकर लड़ाई करने की ठान ली है। जिस प्रकार से पत्रकार और गैर-पत्रकार कर्मचारियों में आक्रोश है और वे तैयारी कर रहे हैं, उसे देखते हुए कोई दो राय नहीं कि जागरण, भास्कर व पंजाब केसरी के मालिकों को या तो मजीठिया वेतनमान देना पड़ेगा, या सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना पर जेल जाने की नौबत आएगी।

बता दें कि मजीठिया से बचने का अब न तो कोई वैधानिक रास्ता बचा है और न ही लोक सभा चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार ही उसमें कुछ कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के बदलने से भी कुछ नहीं हो सकता है, क्योंकि पुनर्विचार याचिका यानि रिव्यू पिटिशन खारिज होने के बाद इस मामले में करने के लिए कुछ बचा ही नहीं है। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इतर कुछ भी करना सीधा उसके आदेश का उल्लंघन है। इसके बावजूद अखबार मालिक कर्मचारियों की मजबूरी का फायदा उठाना चाह रहे हैं।

कानपुर के सूत्रों से एक जानकारी यह मिली है कि जागरण प्रकाशन लि. के निदेशक मंडल की 28 अप्रैल सोमवार को बैठक बुलाई गई है। इसी बैठक में तय हो जाएगा कि मजीठिया मिलेगा या नहीं। अगर मिलेगा तो किसे, कितना और कैसे। इसी पर मगजपच्ची बैठक में होनी है। बैठक के बाद कर्मचारियों को बिना मजीठिया दिए खून के आंसू रुलाने के नायाब तरीकों को लागू किए जाने का क्रम शुरू किया जा सकता है।

कर्मचारियों को जो अधिकारी जितना अधिक प्रताड़ित कर लेगा, उसे उतना ही अधिक वेतन बढ़ोतरी का लाभ मिलेगा। इसी लोभ में अब अधिकारी तलवार लेकर कर्मचारियों पर टूट पड़ेंगे। मालिकों के लिए ऐसा कराना इसलिए जरूरी हो गया है, क्योंकि उनके पास बचने का कोई कानूनी उपाय है ही नहीं। मालिकान यह अच्छी तरह से जानते हैं कि अखबार कर्मियों में एकजुटता कितनी मुश्किल है। फूट डालो और राज करो के फार्मूले से कर्मचारियों के कानूनी हक को आसानी से मारा जा सकता है।

अब यह अलग बात है कि दैनिक हिंदुस्तान जैसे अखबारों के मालिकान ने स्थिति की गंभीरता को भांप लिया है। उनके मालिकान संपादक नामधारी बिचौलियों के झांसे में नहीं आ रहे हैं। मुख्य संपादक शशिशेखर ने अखबार की मालकिन शोभना भरतिया को एक बार तिकड़म समझाने का प्रयास किया। इस पर शोभना ने उन्हें झिड़क दिया और कहा, हमें ऑफिस आना अच्छा लगता है, कोर्ट के चक्कर काटना नहीं।

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