कटघरे में काटजू, पद की गरिमा और प्रेस काउंसिल की औकात

0
150

Justice Katju

जस्टिस मार्कंडेय काटजू एक बार फिर खबरों में हैं। और बीजेपी भड़की हुई है। काटजू ने एक लेख लिखा। उसमें कहा कि गोधरा में क्या हुआ था, अभी भी यह एक रहस्य है। काटजू ने मुसलमानों को निशाना बनाने और लोगों को जान से मारने की कार्रवाई की हिटलर से तुलना की। वे यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि दंगों में मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई हाथ नहीं था। उन्होंने मोदी के विकास के दावों को भी ख़ारिज किया। लेख में उन्होंने अंत में अपील की थी कि लोग अपने वोट डालते समय ख़्याल रखें नहीं तो वे भी वहीं ग़लती करेंगे जो जर्मनी की जनता ने हिटलर को जिताकर की थी। कांग्रेस और उसके समर्थकों ने काटजू की पीठ थपथपाई और जमकर तारीफ की।

वैसे, काटजू को जो लोग जानते हैं, वे यह भी जानते हैं कि काटजू बड़बोले हैं। बदजुबान भी हैं और बदनीयत भी। होने को तो वे प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं। लेकिन हमारे देश में किसी गली मोहल्ले से छपनेवाले साप्ताहिक – पाक्षिक के संपादक से ज्यादा उनकी औकात नहीं है। काटजू से ज्यादा धाक तो हमारे उन बहुत सारे पत्रकारों की है जो अपने विजिटिंग कार्ड पर ठसके के साथ बड़े से अश्ररों में प्रेस छपवाते हैं और बड़े बड़े अफसरों ही नहीं मंत्रियों तक को धमका कर चले आते हैं। काटजू भले ही कौंसिल के चेयरमेन हैं। पर उनसे डरता कौन है। कोई नहीं। और डरे भी क्यों। लोग सांप से डरते हैं। पर बहुत सारे सांप ऐसे भी होते हैं, जो डस भी ले, तो उसका कोई असर तक नहीं होता।

हमारे काटजू महाराज भी उस प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन हैं, जिसे संवैधानिक दर्जा तो है, लेकिन किसी को वह नुकसान नहीं पहुंचा सकती। प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन की हालत को ज्यादा अच्छी तरह से समझना हो, तो अपने श्रद्धेय सरदार श्री मनमोहन सिंह जी को देख लीजिए। होने को भले ही वे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश के पीएम हैं। लेकिन कोई कांग्रेसी उनसे डरता है ? सारे के सारे मंत्री – संत्री, सब डरते हैं श्रीमती सोनिया गांधी से, या फिर राहुल गांधी से। हमारे मनमोहन सिंह के पास पद भी है, प्रतिष्ठा भी है, पर अधिकार नहीं हैं। वे सरदार तो हैं, पर असरदार नहीं है। काटजू भी बिल्कुल ऐसे ही हैं। इसलिए प्रेस की पूरे देश की जिस कौंसिल के काटजू चेयरमैन हैं, उस प्रेस के ही ज्यादातर भाई लोग उन पर पिल पड़े हैं। मोदी पर काटजू की टिप्पणी को लेकर बीजेपी पहले ही भड़की हुई थी। लेकिन काटजू के बचाव में जैसे ही कांग्रेस सामने आई, तो बीजेपी का पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया। बीजेपी की मांग है कि या तो काटजू खुद इस्तीफा दें या फिर सरकार हटाए। बीजेपी के मुताबिक काटजू कांग्रेस के हाथों में खेल रहे हैं। जुडिशियल पोस्ट पर बैठे आदमी को राजनीतिक टिप्पणियां करने का कोई हक नहीं होता।

हालांकि यह कोई पहला मामला नहीं है जब जस्टिस काटजू अपने किसी बयान से विवाद में रहे हों। उत्तर प्रदेश के सीएम अखिलेश सिंह यादव की सरकार की आलोचना को वे गलत बता चुके हैं और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी के कामकाज पर उन्होंने खुद ही बहुत अशोभनीय और अजीबो गरीब टिप्पणी की थी। कुछ दिन पहले ही काटजू हमारे हिंदुस्तान के 90 फीसदी लोगों को बेवकूफ कह चुके हैं। कांग्रेस को खुश करने के लिए काटजू गैर कांग्रेसी सरकारों के खिलाफ अकसर बयान इसलिए दिया करते हैं। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के जज से रिटायर होने के पंद्रह दिनों के भीतर ही कांग्रेस ने काटजू को प्रेस कौंसिल ऑफ इंडिया का चेयरमैन बना दिया। सरकार के अहसान का इतना बदला तो चुकाना ही पड़ता है। आप और हम अगर उस पद पर इस तरह आते, तो अपन भी वैसा ही करते, जैसा काटजू कर रहे हैं। वैसे माफ करना जज का काम होता है। लेकिन गलतियां तो मजिस्ट्रेट, जज, जस्टिस

और उनके बाप दादा भी करते ही हैं। सो, आप माफ कर दीजिए काटजू को।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और वरिष्ठ पत्रकार हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

twenty − eighteen =