सत्य का प्रतिवेदक होता है पत्रकार

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आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र सम्मान से सम्मानित हुईं पांच हस्तियां
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आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र सम्मान से सम्मानित हुईं पांच हस्तियां



आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र सम्मान से सम्मानित हुईं पांच हस्तियां
आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र सम्मान से सम्मानित हुईं पांच हस्तियां

मुंगेर के प्रमंडलीय आयुक्त नवीन चंद्र झा ने कहा है कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जिससे देश और समाज के प्रति अपने कर्तव्य का बोध हो सके. आयुक्त रविवार को स्थानीय नगर भवन में आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र स्मृति सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कही. उन्होंने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि साक्षर होना शिक्षित होना नहीं है. वास्तव में शिक्षित वह है कि जो समाज और देश के लिए काम करें, राष्ट्रीय एकता, अखंडता के लिए संघर्ष करे और अन्याय व अत्याचार के खिलाफ आवाज बुलंद करें.

उन्होंने आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्र मेमोरियल फाउंडेशन नई दिल्ली एवं मुंगेर पत्रकार समूह की ओर से ” अहिंसक लोक शक्ति, शिक्षा और पत्रकारिता ” विषय पर आयोजित संगोष्ठी में आचार्य लक्ष्मीकांत मिश्रा की पत्रकारिता को याद करते हुए कहा कि वे वास्तव में सत्य के प्रतिवेदक थे. उन्होंने कहा कि आज की पत्रकारिता में सत्य ओझल होने लगा है. जबकि आचार्य मिश्रा सत्य को लिखने के लिए हद तक की जोखिम उठाने में कभी संकोच नहीं करते थे. उन्होंने लोक शक्ति को परिभाषित करते हुए कहा कि लोक शक्ति कभी हिंसक नहीं हो सकती है और लोक शक्ति को कोई चुनौती नहीं दे सकता है. लोक शक्ति के जरिये विभिन्न नायकों ने राज्य सत्ता को भी चुनौती दी और उसे नियंत्रण में भी लाया. अतिथियों का स्वागत करते हुए मेयर कुमकुम देवी ने इस समारोह को मुंगेर की जनता का समारोह बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज को नई राह मिलती है. इसे हर वर्ष मनाया जाना चाहिए. इससे पूर्व बहस को आगे ले जाते हुए पुलिस अधीक्षक आशीष भारती ने कहा कि लोक शक्ति के सबसे बड़े प्रेरणा स्त्रोत महात्मा गांधी हैं. जिनके अहिंसक आंदोलन ने दुनिया को राह दिखायी. उन्होंने नक्सलवादी आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ लोग भोले भाले लोगों को बहका कर हिंसक कार्रवाई में उतार देते हैं. उन्होंने कहा कि लोक शक्ति जब हिंसक होती है तो वह विध्वंसक हो जाती है.स्वामी निरंजनानंद सरस्वती की अनुपस्थिति उनका प्रतिनिधित्व बिहार योगविघालय के स्वामी ज्ञानभिक्षु ने किेयात्. बिहार योग विद्यालय के स्वामी ज्ञान भिक्षु ने कहा कि शिक्षा के माध्यम से अहिंसक लोक शक्ति जगायी जा सकती है. उन्होंने अहिंसक लोक शक्ति में शिक्षा और पत्रकारिता दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका बतायी. क्योंकि शिक्षा के माध्यम से ही व्यक्ति अच्छा और बुरा सोच पैदा करता है और पत्रकारिता लोक शक्ति को जागृत करने का सशक्त माध्यम है. वरिष्ठ पत्रकार प्रसून लतांत ने कहा कि भारत हमेशा शांतिप्रिय देश रहा है और वह कभी, कहीं भी सेना लेकर लड़ने नहीं गया. अगर गया तो दर्शन और संस्कृति का ज्ञान बांटने गया. संचालन करते हुए कुमार कृष्णन ने कहा कि आजादी के बाद लोक शक्ति का सबसे बड़ा प्रयोग जनादेश 2007 और जन सत्याग्रह 2012 रहा. जिसके आगे सरकार झुकी और भूमिहीनों के पक्ष में कानूनों में बदलाव आये. कार्यक्रम में देश के प्रसिद्ध पत्रकार हरिवंश, सुप्रसिद्ध साहित्यकार पद्मश्री उषा किरण खां, अलका सिन्हा, डॉ शिवचंद्र प्रताप, ताबिश रजा के संदेश को पत्रकार राणा गौरीशंकर ने पढ़ा।पढ़े गये. बहस में शिवधाम के संस्थापक स्वामी अनुरागानंद, रामनिवास पांडेय, डॉ शिवशंकर सिंह पारिजात, नवल किशोर सिंह, केके उपाध्याय, कंचन, पंचम नारायण सिंह,राणा ऋषिदेव सिंह,राजकुमार सरावगी अवधेश कुमार, वंदना झा, प्रो. शिवरानी, अमरेंद्र मिश्रा, इंदु मिश्रा ने भी अपने विचार व्यक्त किये. कार्यक्रम में राजेश जैन, प्रो शब्बीर हसन, प्रो जयप्रकाश नारायण सहित शहर के बुद्धिजीवियों ने हिस्सा लिया। अंग मदद फाउंडेशन की ओर से बंदना झा ने आगत अतिथयों को अंगवस्त्र भेंट किया।




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