मीडिया मालिकों की पहरेदारी करने वाले पत्रकारों के मुद्दे पर भी कभी बोलिए

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एनडीटीवी इंडिया पर छापे पर प्रेस क्लब में एनडीटीवी के नेतृत्व में एक बैठक का आयोजन किया गया और इसे फ्रीडम ऑफ़ प्रेस पर हमला घोषित किया गया. इसमें कई दिग्गज पत्रकार शामिल हुए. इसी पर पुष्कर पुष्प की सोशल मीडिया पर की गयी एक टिप्पणी –

जब पत्रकारों के हित की बात आती है तो ये सब दांत चियार कर गायब हो जाते हैं।। लेकिन जब मालिकों का सवाल होता है तो सीना तानकर खड़े हो जाते हैं।। नेटवर्क 18 में सैकड़ों पत्रकारों को नियम-कानून ताक पर रखकर निकाला गया तो कोई राजदीप, प्रनॉय सामने नहीं आया।। ऐसे दसियों उदाहरण है जब पत्रकारों का दमन हुआ और मालिकों के नुमाइंदे वरिष्ठ पत्रकार अपनी-अपनी जगह पर कुंडली मारे बैठे रहे।। सड़क पर आना तो दूर, दो शब्द भी न कह सके।। हर न्यूज़रूम में न जाने कितने पत्रकारों का कत्ल(वैचारिक) मोदी, सोनिया,केजरीवाल की जूती पहने मीडिया मालिक करते है।। आपको जरा अंदाज़ा भी है।। कभी उनके लिए भी आवाज़ उठाइये।। सिर्फ प्रनॉय रॉय और उन जैसे मीडिया मालिकों की ही पहरेदारी मत कीजिये।। साधारण पत्रकारों पर भी गौर फरमाएं।। टीवी और अखबार के उन संपादकों पर भी दया दृष्टि डालिये जिन्हें मालिकों ने क्लर्क बनने पर मजबूर कर दिया है।। उनकी स्वतंत्रता पर हो रहे हमले पर भी सवाल उठाइये।। प्रेस क्लब में कभी मीटिंग बैठाइए।। फ्रीडम ऑफ प्रेस का राग तब समझ में आएगा।। #मीडिया_खबर

(पुष्कर पुष्प के फेसबुक प्रोफाइल से साभार)

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