समाचार चैनलों पर दम तोड़ती खोजी पत्रकारिता

समाचार चैनलों में खोजी पत्रकारिता" यानि "INVESTIGATIVE JOURNALISM" आज वेंटिलेटर पर है और अंतिम सांसें ले रहा है.

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दीपक शर्मा और पुण्य प्रसून बाजपेयी - ऑपरेशन
दीपक शर्मा और पुण्य प्रसून बाजपेयी - ऑपरेशन दंगा (दायें से बाएं)

भारत में खोजी पत्रकारिता आखिरी साँसे ले रहा है. अखबार में तो यदा-कदा खोजी पत्रकारिता के कभी-कभी दर्शन हो भी जाते हैं, लेकिन टेलीविजन न्यूज़ में इसके दर्शन दुर्लभ ही हो गए हैं. खोजी पत्रकारिता के धुरंधर रिपोर्टर और पत्रकार या तो हाशिए पर चल गए या फिर खानापूर्ती की ख़बरों में झोंक दिए गए.इसी मुद्दे पर वरिष्ठ पत्रकार रजत अमरनाथ की एक टिप्पणी –

rajat amarnath, journalist
रजत अमरनाथ, वरिष्ठ पत्रकार

रजत अमरनाथ,वरिष्ठ पत्रकार-

“खोजी पत्रकारिता” यानि “INVESTIGATIVE JOURNALISM” आज वेंटिलेटर पर है और अंतिम सांसें ले रहा है. कभी -कभी उभारा लेता भी है तो सिर्फ “INDIAN EXPRESS” और “THE HINDU” जैसे अख़बारों की वजह से. टीवी के “खोजी पत्रकारों” और “संपादकों” की नज़र में “खोजी पत्रकारिता” का मतलब सिर्फ और सिर्फ “स्टिंग” है, आखिर ऐसा हो भी क्यों न जब मालिकान और संपादक ही अपना हित साधने के लिए सत्ता के चरणों में दंडवत हैं. मालिकों को “राज्यसभा” की सीट चाहिए तो “संपादक” को TRP के जरिए कमाई ताकि उसकी मठाधीशी कायम रह सके.

एक खबर के बदले Deepak Sharma जैसे लाजवाब खोजी पत्रकार निकाल दिए जाते हैं और तो दूसरी तरफ अंडरवर्ल्ड में भी अपनी खोजी खबरों के जरिए पैठ बनाने वाली Sheela Raval को भी टीवी पर एंटरटेनमेंट की खबर करते देखा जा सकता है (वैसे टीवी पर कई बार “छोटा शकील” को शीला जी को “दीदी” कहते सुना है) आखिर किसी भी चैनल का मालिक या संपादक कागजों में लिपटे भ्रष्टाचार को उजागर क्यूँ नहीं करना चाहते??? अपने ही अच्छे और सोर्सफुल रिपोर्टर का इस्तेमाल सही तरीके से क्यूँ नहीं करते???

पांच राज्यों मे सत्ता परिवर्तन हुआ है पांचों ही राज्यों में भ्रष्टाचार में लिप्त सरकार थी सत्ता परिवर्तन भी इसी वजह से हुआ है,इस समय पांचो राज्य खबरों से लबरेज हैं लेकिन सारे चैनल “योगी मय” “मोदी मय” हैं कोई भी चैनल चाहे तो पिछली सरकारों का कच्चा चिठ्ठा खोल कर रख दे और जनता को बता दे कि बादल ने कितना लूटा???हरीश रावत ने कितना सरकारी पैसा सत्ता पाने के लिए लुटाया???उत्तर प्रदेश में चाचा से भतीजे की लड़ाई की असली वजह क्या थी???खनन की बंदरबांट क्या थी???बुआ भतीजा अब क्यों एक हो रहे हैं???? रातोंरात जो अधिकारी हटाए जा रहे है उसके पीछे की वजह क्या है??? गोआ में कौन कौन बिका कितने में बिका??? मणिपुर की सरकार बनने के क्या मायने है???? लेकिन ये सब खबरें करेगा कौन???

ये न्यूज़ चैनलों का आपातकाल है जहाँ न अब ज़रूरत उदय शंकर जी,राजू संथानम जी,शाज़ी ज़माँ जी,अरूप घोष जी, प्रभात डबराल जी,विनोद दुआ जी,शीला रावल जी जैसों की नहीं है जो रिपोर्टर के पीछे खड़े हो कर कहे कि “तुम ठोको नेता मंत्री अधिकारी को मैं निपट लूंगा बस सबसे बढ़िया ख़बर लाओ”

(जिसका भी नाम लिखा है उनके साथ काम करनेऔर करीब से जानने का मौका भी मिला था)

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