गणपति बप्पा मोरया, हाय खज़ाना हाय खज़ाना

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गणपति बप्पा मोरया, हाय खज़ाना हाय खज़ाना
गणपति बप्पा मोरया, हाय खज़ाना हाय खज़ाना
गणपति बप्पा मोरया, हाय खज़ाना हाय खज़ाना
गणपति बप्पा मोरया, हाय खज़ाना हाय खज़ाना

महाराष्ट्र में लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने जो गणपति बप्पा मेरया की आधारशिला रखी थी। वही आधार अब मीडिया जगत के ब्यूरोचीफ टाइप लोगों के लिए लक्ष्मी सुखासन बन कर आ गया है। ब्यूरोचीफ टाइप लोगों के मुख पर करारे (नोट) लक्ष्मी जी का भोग लगते ही उन्हें मोदक का भोग भी फीका नज़र आता है। इस विघ्नहर्ता के रसधार में जिन लोगों ने पहले डूबने से मना किया था, अब वही गोता लगाने के फिराक में डोल रहे हैं।

दरअसल मामले को कुछ विस्तार से समझाया जाये ताकि आप भी भोग या गोता लगाने के लिए थोड़ा सा दिमाग की नसों में जोर डाल सके। तो मामला कुछ यूं है कि मुंबई के सबसे प्रतिष्ठित लाला बाग के राजा के बारे में आप लोगों ने पहले से सुना होगा। नाम सुनते ही आपके दिल मे एक बार दर्शन करने की प्रबल इच्छा भी जागृत होगी। लेकिन जब कोई अनहोनी लगे तो फिर शायद आप भी कन्नी काटने लगे। तो अब मुद्दे की बात ये है कि लाल बाग के राजा मुंबई में चार साल पहले से मीडिया के लोगों पर तड़ातड़ हमले होते थे। कोई भी कैमरा मैन या पत्रकार कवरेज करने के लिए जाये तो मजाल क्या कि बिना प्रसाद (मार) खाये विदा किया जाये। जब आयोजकों की तरफ से कोई बचाव नहीं किया गया तो इसका ये कयास लगाया जाने लगा कि लाल बाग के राजा के आयोजक ही मीडिया को कवरेज करने के दौरान दौड़ा – दौड़ा के पिटवा रहे हैं। कई बार शिकायत भी की गई। लेकिन हर शिकायत का जो नतीजा निकलता है। वही इसका भी निकला और नतीजा ढाक के तीन पात।




तब इस इस विषम परिस्थित में टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने फैसला लिया कि लाल बाग के राजा को मण्डप में कवरेज नहीं करेंगे केवल विसर्जन के दिन मण्डप के बाहर कवरेज किया जायेगा। यह कवरेज करने की परंपरा विगत चार साल से चल रही है। इन चार सालों में लाल बाग के राजा के दर्शनार्थियों में भी कमी आ गई। भक्तों की कमी आने से सबसे पहले आयजकों के जेब में भारी कमी आई। इस कमी को पूरा करने के लिए आयोजकों ने सोचा कि मीडिया को लक्ष्मी का भोग लगाना जरूरी है। मोदक से काम नहीं चलेगा। लिहाजा सबसे पहले आयोजकों ने टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के खजांची साहब को पकड़ा। खजांची साहब तो हमेशा खज़ाने की तलाश में रहते ही हैं। जिस एसोसिएशन ने कवरेज न करने का फैसला किया था, उसी एसोसिएशन को लक्ष्मी का भोग लगते ही मीडिया के हमले को भूलकर फिर से पिटवाने की तलाश में घूम रहे हैं। हालांकि मीडिया के रिपोर्टर और कैमरा मैन कई बार कह चुके हैं कि कवरेज करने में कोई समस्या नहीं है किंतु आयोजकों को यह जिम्मेदारी लेना होगा कि मण्डप के अंदर या बाहर मीडिया के ऊपर हमला नहीं किया जायेगा, लेकिन आयोजक लिखित में आश्वासन देने से कतरा रहे हैं। एक तरफ आयोजक कवरेज के लिए परेशान हैं और दूसरी तरफ किसी भी अनहोनी की जिम्मेदारी लेने से भी कतरा रहे हैं। इस जिम्मेदारी से बचने के लिए मीडिया घराने के ब्यूरोचीफ टाइप के प्राणियों को पकड़ा गया है। अब टीवी जर्नलिस्ट एसोसिएशन के खजांची साहब बहुत तेज हैं । तेज के गेयर में हमेशा रहते हैं, लिहाजा खजांची साहब कवरेज करने के लिए पिल पड़े और साथ में मुंबई के मीडिया घराने के सभी ब्यूरोचीफ टाइप प्राणियों को भी अपने लपेटे में ले लिया है। अब ब्यूरोचीफ कोई छोटा-मोटा प्राणी तो है नहीं, उन्हें भी जब तक लक्ष्मी जी का अच्छे से भोग नहीं लगता तब तक वो कुपित रहते हैं। फिलहाल रिपोर्टर और कैमरामैनों तुम लोग लिखित मांगते रहोगे और आपके आका भोग लगा के आपको कवरेज के लिए ठेल देंगे। अब ये बात साफ हो गई है कि ब्यूरोचीफ भाई लोग भी अब गणपति बप्पा मोरया गाना गा रहे हैं। क्योंकि भोग तो अच्छा खासा लग चुका है। बचे रिपोर्टर कैमरामेन लोग तो आप लोग भी पिछली बार की तरह जो प्रसाद (मार) मिला था, उस प्रसाद से बच के रहना और बोलो गणपति बप्पा मोरया।।। (अज्ञात कुमार)

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