गजल संग्रह ‘ जमीं से आसमां तक’ के लोकापर्ण पर कवि सम्मेलन

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गजल संग्रह ' जमीं से आसमां तक' को लोकापर्ण पर कवि सम्मेलन
गजल संग्रह ' जमीं से आसमां तक' को लोकापर्ण पर कवि सम्मेलन

‘मेरी आंखों में ये खला क्या है’

कुमार कृष्णन

गजल संग्रह ' जमीं से आसमां तक' को लोकापर्ण पर कवि सम्मेलन
गजल संग्रह ‘ जमीं से आसमां तक’ को लोकापर्ण पर कवि सम्मेलन

मुंगेर। स्थानीय शिक्षक संघ के सभागार में अशोक आलोक के सद्य प्रकाशित तीसरे गजल संग्रह ‘ जमीं से आसमां’तक के लोकापर्ण समारोह के अवसर पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कवि सम्मेलन में मधेपुरा,सूर्यगढ़ा,सुलतानगंज बरियारपुर, हवेली खड़गपुर, जमालपुर, पटना एवं स्थानीय कवियों ने हिस्सा लेकर कवि सम्मेलन का शुभारंभ अशोक आलोक ने अपनी पुस्त​क से पांच गजलों का पाठ कर किया। पहली गजल का मतला था—

” जमीं पर प्यास फैली है सुलगते आसमानों से
परिन्दा ख्वाब का लौटा नहीं उड़ानों से

तत्पश्चात हिन्दी गजल के प्रमुख गजलकार एवं आलोचक अनिरूद्ध सिन्हा ने तरन्नुम में अपने दो—तीन शेरेां के साथ एक गजल का पाठ किया, जिससे पूरा वातावरण रोमांचित हो उठा। उनकी गजल का मतला था—
”जख्म जब आपका हरा होगा
हाल अपना भी आपसा होगा”

हिन्दी गजल को नई दिशा देनेवाले गजलकार तथा अपनी जीवन का सौन्दर्यवोध करानेवाले गजलकार तथा अध्यक्षता कर रहे ध्रुव गुप्त ने अपनी गजलों का पाठ किया तो पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उनकी पहली गजल –
” मेरी आंखों में ये खला क्या है
तू अगर साथ है तो जुदा क्या है”

मुख्य अतिथि तथा हिन्दी कविता के सशक्त हस्ताक्षर तथा जमालपुर रेल कारखाना के मुख्य कारखाना प्रबधक अनिमेष कुमार सिन्हा ने अपनी दो—तीन
गंभीर कविताओं के साथ दो— तीन गजलों का पाठ किया, जिन्हें श्रोताओं ने काफी वाहवाही दी। उनकी गजल का यह मतला लोगों को काफी पसंद आया—
” सिक्का भी यह कितना अजीब है
अनमोल लोगों को ही यह नसीब है”

विशिष्ट अतिथि पटना से पधारे राजीव कुमार सिंह परिमलेन्दु ने अपनी कविता का पाठ करते करते हुए कहा—
‘ अपनी आदतों में
फूलों की जगह पत्थर भरो
मासूमियत केे हर तकाजे को
ठोकर मार दो”
उदू साहित्य के बेहतरीन शायर फैयाज रश्क ने भी अपनी तीन गजलों का पाठ किया,जिसमें अशोक आलोक की प्रशंसा करते हुए कहा कि —
” शायरी में हैं गजल
के अशोक आलोक”

तत्पश्चात युवा गजलकार विकास ने अपने जोशीलेेेे अंदाज में गजल पाठ करते हुए कहा—
” अभी मौसम सुहाना है, मोहब्बत का नजारा है
हमारा दिल तुम्हारा है, तुम्हारा​ दिल हमारा है”

युवा कवयित्री यशस्वी ने अपनी गजल के मा​ध्यम से कहा—
”हर कदम पर रहे , हर डगर पर रहे
बेखुदी आदमी के सफर में रहे”

पाकिस्तान की घटना को केन्द्रित करते हुए युवा कवि प्रदीप पाल ने कहा—
” उन्हें क्या पता था
बेगैरत वहानों की जुगाली करता
धर्मान्धता की मांद से
निकला है नराधम दहशतगर्दोें का जत्था”

इसके अतिरिक्त कवि सम्मेलन में मधेपुरा,सूर्यगढ़ा,सुलतानगंज बरियारपुर,हवेली खड़गपुर, जमालपुर, पटना एवं स्थानीय कवियों सिद्धेश्वर कश्यप,अंजनी
कुमार सुमन,मुर्तजा सवा,एहतेशाम आलम, दीपक मौर्य, प्रभात मिलिन्द, बिजय गुप्त, एस के प्रोग्रामर, राजकिशोर केसरी,राजेन्द्र राज ने अपनी गजलों
तथा ​कविताओं का पाठ कर भाव वोध को अभिव्यक्ति प्रदान की.

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