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1 Comment on एक महिला न्यूज एंकर की टिप्पणी के बहाने

  1. unknown

    एक महिला का आत्‍मविश्‍वास से भरा होना प्रशंसा का विषय होना चाहिए लेकिन कई पुरुष एंकर भी और ख़ासकर यह मोहतरमा भी शंकराचार्यों तक को अध्‍यात्‍म और मानव-सेवा की ए बी सी डी भी ठीक से न समझने का सर्टिफिकेट दे चुके /चुकी हैं, जिनके जीवन पर नज़र डालें तो इनकी हैसियत उनके चरणों में बैठकर ज्ञान सीखने की भी नहीं (भई सामने वाला आपसे ज्‍़यादा बड़ा जानकार हो सकता है, यह स्‍वीकार करने में दिक्‍़कत क्‍या है ?) । इन मैडम के महाज्ञान में तो इतनी हिक़ारत होती है जैसे एक तो इनसे ज्‍़यादा किसी भी विषय ( राजनीति, समाज, धर्म, अध्‍यात्‍म) की जानकारी रखने की किसी की औकात ही नहीं और दूसरे इन्‍हें कोई क्रॉस क्‍वेशचन नहीं कर सकता क्‍योंकि इनके तथ्‍य शाश्‍वत हैं और इनके ग़लत होने की संभावना हो ही नहीं हो सकती ।
    वैसे इनका या इन जैसों का दोष नहीं है। कितने पात्र लोगों को अवसर मिल पाता है मीडिया में, क्‍या आप जानते नहीं ! औसत लोग, औसत विचार सिरमौर तो होंगे ही क्‍योंकि दूसरे तो इतने भी स्‍तरीय नहीं । आजकल यह वैचारिक गिरावट और घमण्‍ड का कॉकटेल हर जगह देखा जा सकता है, कहने /कहाने, सुनने /सुनाने वाले सब को एक जैसी स्‍तरहीनता का लक़वा लग चुका है । अर्द्धज्ञानी ज्ञान बांट रहे हैं और जनता और जानकार तो विकल्‍पहीनता की स्थिति में चुप रहकर चारों तरफ़ चल रही बकवास सुनने को विवश हैं या अवसरहीनता की स्थिति में औने-पौने पैसों की नौकरी कर अपने चप्‍पल-जूते चटका रहे हैं ।

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