‘फेसबुक’ तो स्वर्ग की ‘इन्द्रसभा’ है !

फेसबुक तो स्वर्ग की इन्द्रसभा है इसमें सुख है,आनंद है,विचार हैं,अमरता है,गान,संगीत, नृत्य, चित्र,मित्र सब हैं,इन्द्रसभा की तरह यहां रसोई ,खाना ,महंगाई ,मंदी ,राक्षस ,पति, पत्नी, संतान,समाज आदि की चिन्ता नहीं है। यहां सिर्फ रस , आनंद और अभिव्यक्ति है।यह सुखियों का संसार है।

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jagadishwar chaturvedi
प्रो.जगदीश्वर चतुर्वेदी

प्रो.जगदीश्वर चतुर्वेदी-

अलग अंदाज़ में फेसबुक की व्याख्या : फेसबुक उल्लू है और उसकी सवारी लक्ष्मी करती है

फेसबुक तो स्वर्ग की इन्द्रसभा है इसमें सुख है,आनंद है,विचार हैं,अमरता है,गान,संगीत, नृत्य, चित्र,मित्र सब हैं,इन्द्रसभा की तरह यहां रसोई ,खाना ,महंगाई ,मंदी ,राक्षस ,पति, पत्नी, संतान,समाज आदि की चिन्ता नहीं है। यहां सिर्फ रस , आनंद और अभिव्यक्ति है।यह सुखियों का संसार है।

फेसबुक क्षणिक और अधूरी अभिव्यक्ति का माध्यम है।

फेसबुक सिरपड़ों का खेल है,यहां अपरिचय के परिचय,बिना दीवार के वॉल,बिना स्याही कागज का लेखन,मुँह देखी मीठी बातें और खोखली प्रशंसाओं की लंबी सूची,सूचनाओं का ढ़ेर, बिना मांगे उपदेश,मजे की बातें,बोरिंग बातें,विज्ञापन और नकली व्यक्तिवाद का खोखला ताण्डव और फेसबुक का अरबों का धंधा।

यानी फेसबुक उल्लू है उसकी सवारी लक्ष्मी करती है।फेसबुक में स्वर्ग और नरक भी हैं , स्वर्ग में उत्तर अमेरिका है वहां की 41 प्रतिशत आबादी ऑनलाइन है । नरक में विश्व की बाकी आबादी है जिसमें मात्र 10 प्रतिशत लोग ऑनलाइन हैं।

अफ्रीका की मात्र 1 प्रतिशत आबादी ऑनलाइन है। ऑनलाइन स्वर्ग है और जो लाइन में है वो नरक में हैं। फेसबुक पर कुछ लोग हैं जो 11बजे के बाद अवतरित होते हैं वे फेसबुक के यक्ष-यक्षिणी हैं।

(लेखक के फेसबुक प्रोफाइल से साभार)

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