‘दस्तक ‘ नाटक ने दर्शको के दिमाग को झकझोंड़ा

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नई दिल्ली। एनबीटी और रेडि़यों मिर्ची द्वारा जापानी पार्क धावा बोल दो अभियान के अन्तर्गत रोहिणी स्थित जापानी पार्क में भारी संख्या में दर्शको ने भाग लिया । उस वक्त अभियान की कहानी में टिस्वट्स आ गया जब ‘ देखों – देखों नाटक देखों ! ‘ के स्लोगन के साथ अस्मिता थिएटर ग्रुप लीड़र मारवा के नेतृत्व में मंचनकर्ता चंग के साथ पार्क में प्रवेश किया और इस ओर जन समुदाय का सैलाब पार्क के मैदान में नुक्कड़ नाटक के रूप में परिवर्तित हो गया । अरविन्द गौड़ के निर्देशन में अस्मिता थिएटर ग्रुप ने नाटक दस्तक का मंचन किया । जिस का संन्देश ‘ हम सब कुछ देखते हैं, सब कुछ जानते हैं, सब कुछ महसूस करते हैं … फिर भी चुप रहते हैं। आखिर कब तक ? क्यों नहीं चुप्पी तोड़तंे ? इन सवालों ने उपस्थित जन समुदाक को झिंझोड़ा ।

इस पर सेक्टर – 3 रोहिणी निवासी नीतू सेजवाल ने अनायास ही नाटक में हिस्सा लेकर अपना अनुभव बताते हुए कहा कि ‘ जब मेरी दूसरी बेटी का जन्म हुआ तो रिश्तेदारों का नजरिया काफी खराब था । यहां तक कि नर्स ने जब बेटी को मुझे सौंपा था, उसके चेहरे पर उदासी थी । मैं भी आहत थी । लेकिन आज मुझे अपनी बेटी पर गर्व है । इस तरह उसने अपना अनुभव पेश किया । अपनी मां के साथ नाटक देख रही 18 वर्षीय अनीता जोशी का कहना है कि नाटक के जरिये समाज की समस्याओं को सामने लाया जा सकता है । वही पर उपस्थित एक दर्शक ने कहा कि हमें घर से ही शुरूआत करनी होगी । हम अपने बेटों को भी बताएं कि महिलाओं की इज्जत करें ।

महिलाओं ने बात उठाई कि जब हम पार्क में आते हैं तो लड़के कमेंट करते हैं । उन्हें रोकने वाला कोई नहीं होता, ऐसे में हम पार्क में आ ही नहीं पाते । कईयों ने उर्पयुक्त कथन पर प्रतिक्रिया में कहा कि लड़कियां भी ऐसे कपड़े पहनती हैं जिससे लड़के प्रोवाक होते हैं । पार्क में कई कपल ऐसी हरकत करते हैं जिसे देखकर दूसरे लोग भी गलत काम करते हैं । उनकी इस बात पर एक टीनएजर ने कहा कि अगर कोई कपल एक दूसरी की सहमति से कुछ कर रहा है, तो आप या हम उन्हे रोकने वाले कौेन होते ? आप उन्हे रोकने की बात कीजिए जिनकी वजह से लड़कियां कहीं भी सुरक्षित महसूस नहीं करती । उसने सवाल खड़ा किया कि कपड़ों को जिम्मेदार बताने वाले जवाब दें कि 4 – 5 साल की मासूम के साथ और बुर्जुग के साथ क्यों छेड़खानी और रेप करते हैं ? इस बच्ची की बात का ऐसा असर हुआ कि सभी महिलाएं उसके सपोर्ट में आ गई । यहा तक कि उक्त बुजुर्ग ने भी माना कि समाज की मानसिकता बदलनी चाहिए ।

भारतीय समाज की नग्न विकृति के खिलाफ एक सशख्त नाटक दस्तक प्रस्तुति के बाद नागरिक समुदाय के कुछ लोगों का कहना था कि पार्क में अश्लील हरकतों को रोक ने और प्रशासनिक समस्याओं को भी नाटक के माध्यम से उठाया जाना चाहिए । एक बार तो ऐसा लगा कि स्त्री और पुरूष दोनों ओर पक्ष और विपक्ष बन गए ऐसी स्थिति बनने लगी ग्रुप लीड़र मारवा ने व्यस्था दी कि बारी बारी से अपनी बात कह सकते हैं और एक दूसरे को सुनना सीखों ! और लोगों ने अपनी बात रखी इस तरह एक अच्छी डि़बेट की शुरूआत की । यही नाटक का मकसद भी था कि लोगों में जाग्रति आए और पार्क लड़कियों के लिए भय मुक्त बन सके । इसी के साथ नाटक के निर्देशक अरविन्द गौड़ ने लोगों से सवाल किया कि क्यों हम सब कुछ देखते हुए भी खामोश रहते हैं ? इस के जवाब में एक व्यक्ति ने कहा कि ‘ मैं प्रण लेता हंू कि मैं अपने बेटे को महिलाओं की इज्जत करना सिखाऊगा । इस पर उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ उक्त शख्स के कथन का स्वागत किया । नाटक की इस मायने में सार्थक रहां । यही नहीं नागरिकों ने बढ़चढ़ कर बड़े उत्साह के साथ संवाद में भागीदारी की ।

{ सुरेन्द्र प्रभात खुर्दिया नई दिल्ली } । 9560681342

 

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