आशुतोष का ट्वीट पढ़कर विचार आया कि क्या ये एक नामी पत्रकार का अहंकारी पतन है?

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विकास मिश्र,पत्रकार,आजतक

ashutosh-cartoonसफेद कपड़ों पर दाग जल्दी लगते हैं। गंगा गंगोत्री से एक बार नीचे गिरती है तो समंदर के खारे पानी में मिल जाती है। पूरब की लोक कहावत है-बखानल धीया डोमे घरे जालिन (जिस बेटी की बहुत बड़ाई होती है, वो नीच के साथ ही भागती है)। पतन के और भी उदाहरण हैं। डरता हूं कि भविष्य में इन्हीं में से एक कहावत अरविंद केजरीवाल और उनकी आम आदमी पार्टी के नाम से भी न बन जाए। मैं भी बाकायदा आम आदमी पार्टी का सदस्य हूं, ऑनलाइन सदस्यता ले रखी है। वैचारिक धरातल पर देश और देशसेवा के नाम पर जो पार्टी खड़ी हुई, जिसे जनता का इतना सम्मान और प्यार मिला, उसके नेता अहंकार में रावण को भी मात दे रहे हैं।

आशुतोष जी, जिनका मेरी नजरों में बतौर पत्रकार सम्मान है, उनके ताजा ट्वीट पर हतप्रभ हूं। कहते हैं कि ट्रेन में लिखा रहता है कि ‘रेलवे आपकी संपत्ति है, इस नाते इसमें तोड़फोड़ का उन्हें और उनकी पार्टी को जायज हक है।’ ये एक नामी पत्रकार का अहंकारी पतन है कि नहीं।

कुमार विश्वास को ही देखिए। गिनती की आधा दर्जन सुनने लायक कविताएं लिखने वाले ये स्वनामधन्य कविताई में खुद को दिनकर, मैथिलीशरणगुप्त, तुलसी, कबीर से ऊपर समझते हैं। और अब बतौर नेता इनका अहंकार सातवें आसमान पर है। जैसे बॉलीवुड में कमाल खान, वैसे राजनीति में कुमार विश्वास।

सोमनाथ भारती की बद्तमीजी और बदमिजाजी तो जगजाहिर है। खुद केजरीवाल दुनिया भर में सबको चोर और भ्रष्ट होने का खिताब बांट रहे हैं। शर्म, लिहाज, सम्मान, तहजीब न तो भाषा में है और न ही भाव में।

महात्मा गांधी के रास्ते पर निकले थे, लेकिन इतने पतित हो गए कि अब राज ठाकरे की राह पर चल निकले हैं। कभी कांग्रेस की गोद में किलकारी मारते दिखते हैं तो कभी बीजेपी के एजेंट बने दिखाई देते हैं। जनता की भावनाओं से जो खेल हो रहा है, हो सकता है कि केजरीवाल एंड कंपनी को उनके मकसद में थोड़ी बहुत कामयाबी दिला भी दे। फिर भी मैं याद दिला दूं कि अगर सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें, सतयुगी सपने दिखाने से वोट मिलते तो 70-80 के दशक में जयगुरुदेव देश के प्रधानमंत्री बन जाते।

अभी पार्टी का एक मेल आया है मेरे पास, मुझसे भारत का भविष्य बदलने के लिए 1000 रुपये का चंदा मांगा है। रकम बड़ी नहीं है, लेकिन गाढ़ी कमाई, गलत मकसद में लगने का खतरा साफ दिखाई दे रहा है।

(स्रोत-एफबी)

2 COMMENTS

    • esi uool jalool baate kar sakte ho.. kyu media ke camre sirf modi pichey rehte h.. punjab me kon jeet raha h.. waha ka survey kyu nhi dikha te.. paid media modi ko support kar raha h.. sabko pata h. kyu

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