मीडिया महारथियों को शराबनोशी करने पर चाबुक नहीं मार सके अन्ना

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-विनीत कुमार

anna-alcohol-mediaमीडिया महारथी कार्यक्रम के 50 मीडिया महारथी रियलटी शो का विरोध के बाद शराबनोशी का दौर चल रहा था. कुछ लोगों की रसरंजन के प्रति प्रतिबद्धता चरम पर थी कि आत्मसम्मान का क्या है, वो तो पीआर एजेंसी दुरुस्त कर ही देंगे, मुफ्त की शराब कैसे छोड़ दी जाए और वो भी द पार्क होटल में..सो जम रहे.

अन्ना हजारे के कान तक ये बात पहुंची कि लोग शराब पी रहे हैं. वैसे तो शराब का संबंध नैतिकता या सरोकार से नहीं है लेकिन अन्ना हजारे इस देश में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन सीजन 1, 2,3..होस्ट करने के अलावे अपने गांव को शराब मुक्त और शराब पीनेवाले को पेड से बांधकर दंड़ित करने के लिए मशहूर रहे हैं.

अन्ना शराब, केबल टेलीविजन को जहर मानकर इसका विरोध करनेवाले के रुप में ख्याति प्राप्त हैं. लेकिन यहां मामला दूसरा था. यहां शराब पीनेवाला कोई निरक्षर, गरीब,लाचार शख्स नहीं था जिस पर कि अन्ना का चाबुक चलता रहा है.

इस बार थे लोकतंत्र का चौथा खंभा यानी मीडिया( जो कि मेटाफर भर है) के नुमाइंदे मीडियाकर्मी…ऐसे में अन्ना टीवी स्क्रीन से बहुत पहले उतार फेंक दिए गए हैं, वेवजह मीडियाकर्मियों के दिल से क्यों उतरते..सो उन्होंने इस पर कुछ बोलने और विरोध करने के बजाय हल्के से कट लिए.

(एफबी से साभार)

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