रवीश जैसी भाषा का इस्तेमाल दूसरे एंकर क्यों नहीं करते-ओम थानवी

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ओम थानवी, संपादक, जनसत्ता

NBA या टीवी के किसी संगठन/समूह को हिंदी चैनलों के लिए शब्दावली गढ़नी चाहिए। हमेशा कहते हैं — “आप बने रहिए”। क्या बने रहिए? बताइए! अंगरेजी जुमले का निपट अनुवाद कर छोड़ा है। सहज ही बोल सकते हैं कि आप कार्यक्रम देखते रहिए, हम अभी लौटकर आते हैं।

ऐसे ही, किसी भी रिपोर्टर से कुछ भी पूछिए, सबसे पहले दो निरर्थक शब्द जरूर बोलेगा — “जी, बिलकुल”!

एंकर: आग वहाँ कब लगी थी सुमंत? सुमंत: “जी, बिलकुल …!”

कुछ प्रस्तोता हैं जो जरूर कल्पनाशील प्रकट होते हैं। उदहारण के लिए, राहुल देव और उर्मिलेश के मुंह से मैंने ब्रेक के लिए ‘अंतराल’ सुना। ‘ब्रेक’ में भी हर्ज नहीं है, पर थोड़ी रवानी तो लानी चाहिए! क्या नया नहीं लगेगा जो कोई कहे कि हम ले रहे हैं छोटा-सा ब्रेक, शायद उतना छोटा भी न हो, पर आप कहीं जाइएगा नहीं … हम फौरन लौटते हैं, पर देखिए रिमोट की शरण में मत चले जाइएगा, मुद्दा अभी बाकी है…। जैसे रवीश अपने चुटकी भरे अंदाज में कुछ नए प्रयोग लाते हैं: हम जैसे गए, वैसे आए …

(स्रोत-एफबी)

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