एबीपी पर प्रसारित महाराणा प्रताप की कहानी वेद उनियाल की ज़ुबानी

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ved uniyal, journalist
वेद उनियाल,वरिष्ठ पत्रकार




वेद उनियाल के जरिए जानिए एबीपी न्यूज़ पर प्रसारित महाराणा प्रताप की गाथा

वेद उनियाल,वरिष्ठ पत्रकार
वेद उनियाल,वरिष्ठ पत्रकार

एबीपी न्यूज़ पर ‘भारतवर्ष’ का प्रसारण पिछले कुछ समय से हो रहा है जिसे हरेक शनिवार और रविवार को रात 10 बजे दिखाया जाता है. इसमें हरेक बार एक व्यक्ति विशेष की गाथा दिलचस्प अंदाज़ में बताई जाती है. इस बार का एपिसोड महाराणा प्रताप पर था. इसी एपिसोड पर वरिष्ठ पत्रकार ‘वेद उनियाल’ की टिप्पणी और पूरे एपिसोड की समीक्षा –

1- एबीपी चैनल के भारतवर्ष सीरियल में इस बार का एपिसोड महाराणा प्रताप पर केंद्रित था। महाराणा प्रताप यानी बचपन के काकी नाम से कहे जाने वाले इस नायक को पृथ्वीराज चौहान से कुछ अलग देखना होगा। पथ्वीराज वीर योद्धा थे, लेकिन उनकी महत्वकांक्षा और पडौसी राजाओं से लड़ाई में उनका अहंकार भी झलकता था। एक तरह का अहंकार जिसने गौरी को पराधीन होने पर भी मुक्त होने का अवसर दिया। जो संयोगिता का खुलेआम हरण कर सकता था। इसके विपरीत महाराणा प्रताप का शौर्य अपने राज्य और लोगों के लिए था। उसमें अहंकार के बजाय जीवटता और त्याग नजर आता है। उनमें देशभक्ति कूट -कूट कर भरी थी। उनमें आपसी राजाओं से ईर्ष्या के प्रसंग नजर नहीं आते।

2- इस सीरियल ने बखूबी समझाया कि जिस तरह नादिरशाह ने दिल्ली को जीतने के बाद भी कत्लेआमी का आदेश दिया और दिल्ली को रौंद दिया बिल्कुल उसी तरह अकबर के सैनिकों ने चित्तौड को जीतने के बाद भी उसे रौंदा, लोगों को तडपा दिया। चित्तोड लाशों से पट गया। फिर यही से सवाल भी उठता है कि कैसे समान घटनाओं में एक राजा महान हो जाता है और दूसरा दुर्दांत। कैसे अकबर के साथ महान शब्द जुडता है। इतिहास को कई संदर्भों में रेखांकित किए जाने की जरूरत है।

4- महाराणा सच्चे मायनों में नायक थे। इतिहास अकबर पर जितना लिखता है उतना महाराणा प्रताप पर नहीं। चैनल का यह ऐपिसोड इस मामले में महत्वपूर्ण था कि कई तथ्यों के साथ सामने आया। यह बताता हुआ कि किस तरह अकबर बादशाह भी अपने इस शत्रु के प्रति मन ही मन सम्मान करता था। उसके निधन की खबर पर वह लगभग बिलख उठा। चैनल में इस प्रसंग को अच्छे ढंग से दिखाया गया। खासकर अंतिम भावुकता के क्षणों को बहुत कुशलता से दिखाया गया।

5- हल्दीघाटी के युद्ध और चेतक की वीरता का इतिहास में वर्णन आता है। अच्छा होता कि अगर चेतक के स्मारक को दिखाया जाता , या फिर नाले की उस जगह को जहां फंलाग मार कर चेतक ने राणाप्रताप को बचाया और फिर वीरगति प्राप्त की।




6- अकबर को सही स्वरूप में दिखाया गया। फिल्म मुगले आजम अकबर ेक भव्य स्वरूप को प्रस्तुत करने के लोभ से नहीं बच सकी। जबकि इतिहास के पन्ने कहते हैं कि अकबर का व्यक्तित्व बहुत साधारण सा था। वह चारों दिशाओं को जीतने वाला सम्राट था लेकिन हमेशा अपने करीबियों से महाराणा प्रताप के शौर्य व्यक्तित्व की प्रशंसा करते था।

7- मानसिंह से जुड़े प्रसंग को ठीक तरह से दिखाया गया। पर मानसिंह और महाराणा प्रताप के पूर्व संबंधों का जिक्र किया जाना चाहिए था।

8 – चैनल हल्दीघाटी के मैदान को भी दिखााता तो और रुचिकर होता

9- चेतक का वर्णन किया जाना चाहिए था। बहुत रुचिकर बातें हैैं उसके बारे में।

10- उस घटना का स्मरण नहीं किया गया जब बिल्ली के जरिए घास की रोटी छीनने पर दुखी होकर महाराणा के करीबियों ने अकबर से संधि का दवाब डाला। कहा जाता है कि एक गलत पत्र भी अकबर तक पहुंचा था। इन बातों का भी उल्लेख हो सकता था

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