मुजफ्फरपुर के साथ एबीपी न्यूज़ की गुंडई !

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एबीपी न्यूज़ के न्यूज़ एंकर अखिलेश आनंद मुजफ्फरपुर की खबर पेश करते
एबीपी न्यूज़ के न्यूज़ एंकर अखिलेश आनंद मुजफ्फरपुर की खबर पेश करते

सार्थक,दर्शक(मुजफ्फरपुर)-




एबीपी न्यूज़ के न्यूज़ एंकर अखिलेश आनंद मुजफ्फरपुर की खबर पेश करते
एबीपी न्यूज़ के न्यूज़ एंकर अखिलेश आनंद मुजफ्फरपुर की खबर पेश करते

शाही लीची के लिए मशहूर बिहार के ‘मुजफ्फरपुर’ और उत्तरप्रदेश के मुज़फ्फरनगर के बीच न्यूज़ चैनल वाले अक्सर कन्फ्यूज रहते हैं. सरकारी चैनल दूरदर्शन पर तो न जाने कितनी बार मुजफ्फरपुर को मुज़फ्फरनगर कहा जा चुका है. कहने का अभिप्राय है कि मुजफ्फरपुर के साथ ज्यादती का न्यूज़ चैनलों का इतिहास पुराना है. ताजा मामला एबीपी न्यूज़ का है.

दरअसल मुजफ्फरपुर के केन्द्रीय विद्यालय में स्कूली छात्रों के मारपीट का एक वीडियो अभी कुछ दिन पहले नेट पर वायरल हुआ. उसके बाद तमाम न्यूज़ चैनलों ने उसे अपने-अपने चैनलों पर दिखाया.

पहले संभावना जताई गयी कि ये वीडियो दिल्ली के किसी स्कूल का हो सकता है. लेकिन जब एबीपी न्यूज़ ने अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘वायरल सच’ में पड़ताल की तो वीडियो मुजफ्फरपुर के स्कूल का पाया गया.

उसके बाद एबीपी न्यूज़ पर खबर चली और उसका असर भी हुआ कि स्कूल और प्रशासन सजग हुए. मारपीट करने वाले दोनों छात्र सस्पेंड भी हुए. लेकिन एबीपी न्यूज़ ने जो हेडलाइन बनाई वो बेहद आपत्तिजनक और शहर की इमेज खराब करने वाली थी.

एबीपी न्यूज़ की हेडलाइन थी – “मुजफ्फरपुर के गुंडे”

आखिर डेस्क पर बैठे हेडलाइन लिखने वाले पत्रकार को इतना भी कॉमन सेन्स नहीं कि ‘मुजफ्फरपुर के गुंडे’ का क्या अभिप्राय होता है. आप ऐसे लिख रहे हैं जैसे पूरा मुजफ्फरपुर ही गुंडों से भरा है और वहां सिर्फ गुंडई ही होती है. एबीपी न्यूज़ को गुंडा लिखने का इतना ही शौक था तो ज्यादा-से-ज्यादा ये लिख सकता था कि “स्कूल के गुंडे”. लेकिन मुजफ्फरपुर के गुंडे लिखकर एबीपी न्यूज़ ने दरअसल मुजफ्फरपुर के साथ गुंडई की. गौरतलब है कि एबीपी न्यूज़ के संपादक मिलिंद खांडेकर और न्यूज़ एंकर अखिलेश आनंद जब सोशल मीडिया पर मुजफ्फरपुर वाली खबर को शेयर करते हैं तो शब्दों का चयन बड़ी सावधानी से करते हैं.




मसलन अखिलेश आनंद फेसबुक पर खबर के बारे में बताते हुए लिखते हैं – स्कूल में गुंडागर्दी ..मुजफ्फरपुर के स्कूल में क्लास रूम में छात्र को पीट पीट कर किया अधमरा…पूरी खबर #ABP News पर

वहीं एबीपी न्यूज़ के संपादक मिलिंद खांडेकर लिखते हैं – “स्कूल में पिटाई का ये वीडियो आपने फ़ेसबुक पर देखा होगा । ये वीडियो बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के सेंट्रल स्कूल का है । जिन दो छात्रों पर पिटाई का आरोप है उन्होंने अपना आतंक दिखाने के लिए ख़ुद वीडियो वाइरल किया था । इनके पिता फ़ौजी पर हत्या, रंगदारी जैसे गम्भीर आरोप है.अब मुज़फ़्फ़रपुर पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लिया है।”

सवाल उठता है कि जब संपादक और एंकर संयत भाषा में इस खबर के बारे में लिख रहे हैं तो आखिर किसने और किसकी अनुमति से ये हेडलाइन लिखी? साफ़ है कि शहर की इमेज खराब करने की बदनीयती से या फिर ऐसी हेडलाइन लिखकर कुछ ज्यादा टीआरपी लाने की ख्वाहिश में मुजफ्फरपुर के साथ ऐसी गुंडई की गयी.

तभी वरिष्ठ पत्रकार अनुरंजन झा शंका जाहिर करते हुए सोशल मीडिया पर लिखते हीं – “मुजफ्फरपुर के गुंडों से ज्यादा खतरनाक वो है जो चैनल में बैठकर यह स्लग लिख रहा है”

दूसरी तरफ पत्रकार विकास लिखते हैं – “ये घटना निंदनीय है, लेकिन हेडलाइन से अहमत”

मुजफ्फरपुर निवासी ‘केशव भारद्वाज’ आश्चर्य प्रकट करते फेसबुक पर लिखते हैं – “Keshav Bhardwaj SEE Tuhin Redhaxor, It says ‘ Muzaffarpur Ke Gunday”

वही हाल ही में मुजफ्फरपुर में मीडिया खबर मीडिया कॉन्क्लेव का आयोजन कर लौटे पुष्कर पुष्प स्कूल में हुई गुंडागर्दी पर अफ़सोस जताते हुए लिखा – “शहर की इमेज बनाने में वर्षों लगते हैं और ख़ाक होने में एक दिन भी नहीं लगता। मुजफ्फरपुर के युवा साथियों की मदद से हमने कुछ दिन पहले ही तमाम मुश्किलों के बावजूद शहर में मीडिया खबर मीडिया कॉन्क्लेव ( मुजफ्फरपुर) का आयोजन किया था।ताकि राष्ट्रीय पटल पर शहर की सांस्कृतिक पहचान और मज़बूत हो। लेकिन शहर के ऐसे नालायक लफंडर सब किये कराये पर पानी फेर देते है।नालायक हो भी क्यों न जब माँ-बाप का ही शह मिला हुआ हो। एबीपी न्यूज़ ने पूरे मामले को कवर किया। उनका शुक्रिया. मगर स्लग कुछ अलग होता तो ज्यादा अच्छा होता. मुजफ्फरपुर के गुंडे से शहर को लेकर नकरात्मक फीलिंग आ रही है.”

(मुजफ्फरपुर से एबीपी न्यूज़ का एक कट्टर दर्शक)

मुजफ्फरपुर के स्कूल में दो छात्रों द्वारा एक छात्र की पिटाई का वाइरल वीडियो –

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