अभिज्ञान को देखकर ऐसा लग रहा था कि वे टीवी शो करने नहीं किसी का दाह-संस्कार करने आये हों

विनीत कुमार

abhigyan banarasहमेशा भारी-भरकम शूट-बूट में लदे-फदे अभिज्ञान को इस पोशाक में देखकर लग रहा है, टीवी शो करने नहीं किसी का दाह-संस्कार करने आये हों.. सबके सब एंकर जमीन पर उतर जाने भर से जमीनी नहीं हो जाते.सबकुछ पोशाक बदल लेने से ही हो जाता तो आधे से ज्यादा नेता कबीर हो जाते और उससे भी ज्यादा हुक्कराम मुक्तिबोध. राजदीप सरदेसाई का कुर्ता-पाजामा गणेश शंकर विद्यार्थी की याद दिला जाता.

(स्रोत-एफबी)

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