AAP के लिए बैक डोर बैटिंग वाले दो टीवी पत्रकार जायेंगे राज्यसभा !

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पुण्य प्रसून आजतक पर फिर हुए क्रांतिकारी, बहुत ही क्रांतिकारी !

अभिरंजन कुमार

@fb एनडीटीवी के Akhilesh Sharma “सुपर-स्टार” पत्रकार नहीं हैं, लेकिन देश के हिन्दी दर्शक उन्हें जानते हैं और मुझे भी अच्छे लगते हैं। लंबे समय तक बीजेपी बीट कवर करते रहे, इसके बावजूद कभी बीजेपी की बैटिंग नहीं की। इस लिहाज से कई बार मैं सोचता था कि उन्हें उन पत्रकारों से सीखने का सुझाव दूं, जो किसी बीट को कवर नहीं करते, फिर भी किसी एक के लिए खुलकर बैटिंग भी कर लेते हैं और अपना “सुपर-स्टार वैल्यू” भी बनाए रखते हैं।

बहरहाल, प्रसंग यह है कि उन्होंने एक सूचना दी है और एक सवाल उछाला है- “आम आदमी पार्टी को दिल्ली की तीनों राज्य सभा सीटें भी मिलेंगी। अगले साल होंगे चुनाव। कौन-कौन? योगेंद्र यादव, कुमार विश्वास, आशुतोष?”

लेकिन मेरा कहना यह है कि राज्यसभा तो “बैक डोर” वालों की है, इसलिए जिन लोगों ने “बैक डोर” से आम आदमी पार्टी के लिए बल्लेबाज़ी की है, ये तीनों सीटें उन्हें मिलनी चाहिए। इस लिहाज से दो टीवी पत्रकारों और एक प्रिंट पत्रकार का हक सबसे ज़्यादा मज़बूत लगता है मुझे। केजरी भाई को उन्हें उनकी वफादारी का मोल ज़रूर चुकाना चाहिए।

जिन तीन लोगों के नाम अखिलेश ने लिए हैं, वे टोपी पहनने वाले हैं, लेकिन जिन तीन लोगों के बारे में मैं बात कर रहा हूं, वे टोपी पहनाने वाले हैं। आख़िर टोपी पहनाने वालों का भी तो कुछ बनता है!

Akhilesh Sharma धन्यवाद आपका। पर मेरी इस पोस्ट में एक तथ्यात्मक ग़लती है। दिल्ली में राज्य सभा का चुनाव अगले साल नहीं 2018 में होगा।

Anuj Singh Bhut shi kha aapne. sayd Ravish kumar AAP k trf s Rajy sabha ja skte h.

Abhiranjan Kumar Anuj Singh जी, मैंने किसी का नाम नहीं लिया। बाकी जनता अपनी-अपनी समझ के मुताबिक समझने को स्वतंत्र है। मैंने सिर्फ़ इतना कहा है कि दो टीवी पत्रकारों और एक प्रिंट पत्रकार को उनका हक़ ज़रूर मिलना चाहिए। अगर उन्हें उनका हक़ नहीं मिला, तो पब्लिक को उनके लिए लिए धरना देना चाहिए।

Shrikrishna Sharma टोपी पहनाने वालों का खुलासा तो कीजिये अभिरंजन जी.

Abhiranjan Kumar भाई Sunny Kumar, आप ही लोग किसी-किसी का नाम ले रहे हैं, मैं तो किसी का नाम ले ही नहीं रहा!

Pushkar Pushp बहुत सही लिखा है आपने. खासकर अंतिम लाइन. टोपी पहनाने वालों को भी कुछ मिलना चाहिए.

Ashish Mehta आप पुण्य प्रसून वाजपेयी , अभय दुबे और ओम थानवी जी के बारे में बात कर रहे है क्या ??
मने पूछ रहे है बाकि तो “जो है सो हइये है” I

Abhiranjan Kumar Ashish Mehta और Sudhir Tiwari जी, मैंने किसी का नाम नहीं लिया है। मैंने सिर्फ़ इतना कहा है कि दो टीवी पत्रकारों और एक प्रिंट पत्रकार को उनका हक़ ज़रूर मिलना चाहिए। जगहें सिर्फ़ तीन हैं, वरना कुछ और लोगों को उनकी सेवा का फल दिये जाने की वकालत कर सकता था मैं।

Ashish Mehta Pushkar जी नाम लेने की जरुरत इसलिए है कि फिर कंही कोई आशुतोष या आशीष खेतान बने तो किसी को झटका न लगे , फिर किसी भाजपा , कांग्रेस वाले को ये न लगे कि आपने तो पेनल में दो दो आप वाले बैठा रखे थे और बताया भी नहीं ..

Prathak Batohi पुण्य प्रसून वाजपेयी , रविश् और ओम थानवी जी के बाद पंजाब से जाने वालों के नाम भी बता दे ।

Binod Kumar हह । नाम से ही तो जान है ।
त पहिला रविश भाई , दोसर दुबे बाबा और तेसर में ओम थानवी जी । भाई मेरा लिस्ट तो हो गई ।
वेटिंग में पूण्य वाजपेयी रहथिन ।

Abhiranjan Kumar मानता हूं कि नाम में इतना रखा है कि लोग नाम जानने के लिए बेचैन हो उठते हैं, फिर भी Pushkar Pushp की बात सही है कि नाम लेने की ज़रूरत ही क्या है? बाकी जनता अपनी-अपनी समझ के मुताबिक समझने को स्वतंत्र तो है ही।

Neeraj Priyadarshy समझदार के लिए इशारा काफी होता है। आपका इशारा किस ओर है समझने के लायक भी है। पर पूूर्वाग्रह से ग्रसित होकर किया गया इशारा भी ़……..
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Sudhir Tiwari अब जो दिखाई दे रहा है वही तो कहा जा सकता है। आप अारोप अपने ऊपर क्यों ले रहे हैं?
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Abhiranjan Kumar Neeraj Priyadarshy भाई, “पूर्वाग्रह” का तो पता नहीं। हां, पर इसमें यह “आग्रह” ज़रूर है केजरी भाई से कि जब भी आप “बैक डोर” से किसी को संसद में भेजें, तो उन्हें प्राथमिकता दें, जिन्होने “बैक डोर” से आपकी “सेवा” की है। दूसरी सभी पार्टियां भी अमूमन ऐसे “सेवकों” का ख्याल रखती हैं। अब प्रियदर्शी भाई, अपने लिए तो कुछ मांग रहा नहीं हूं। जो भी मांग रहा हूं, दूसरों के लिए ही न मांग रहा हूं!
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Pushkar Pushp Ashish Mehta Abhiranjan Kumar आशुतोष और आशीष खेतान इनसे कहीं बेहतर है. एक वक्त के बाद वे पार्टी में चले गए. मगर ये तीनों मेनस्ट्रीम मीडिया में काम करते हुए दर्शकों को आप की टोपी पहना रहे हैं और ये सब अब खुलेआम डंके की चोट पर हो रहा है. बिना नाम लिए ही नाम सबको पता है. एक क्रांतिकारी तो ऐसे हैं जो अपने क्रांतिकारी इंटरव्यू को केजरीवाल की जीत से जोड़कर उसे जस्टिफाय कर रहे हैं.

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