आजतक के पास सच को सामने लाने का कोई दूसरा चारा नहीं था

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aajtak-deepak-sharma-stingआजतक ने ‘ऑपरेशन दंगा’ के माध्यम से कई राजनेताओं को बेनकाब कर दिया। लेकिन पत्रकारीय दृष्टि से देखें तो इसमें ‘सूत्र’ के साथ विश्वासघात किया गया है। ऑफ द रिकॉर्ड बात कर उसे चैनल पर प्रसारित कर दिया गया। क्या अब आपके सूत्र आपपर कभी भरोसा करेंगे? फेसबुक पर जब मीडिया खबर ने ये सवाल किया तो आजतक के पक्ष और विपक्ष में कई तरह की बातें सामने आयी। उन्हीं में से कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियों को हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं। (मॉडरेटर)

Rajeev Ranjan Jha
कल जब यह कार्यक्रम मैंने देखा तो मेरे मन में भी यह प्रश्न आया, लेकिन मुझे लगा कि इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं था। कार्यक्रम के अंत में दीपक शर्मा ने अपील की कि इन पुलिस अधिकारियों ने सच बोला है, कोई रिश्वत नहीं ली, इसलिए इन पर कोई कार्रवाई नहीं की जाये। समाजवादी पार्टी की सरकार इस अपील को कितना सुनेगी यह सबको पता है। कल रात में इस कार्यक्रम के जारी रहने के बीच ही इन सारे पुलिस अधिकारियों पर गाज गिर गयी।

अब रहा सवाल कि क्या सपा सरकार इन अधिकारियों का ज्यादा कुछ बिगाड़ सकती है? मुझे नहीं लगता। सरकार सच बोलने के आरोप में इन अधिकारियों का कुछ नहीं कर सकती। वह ज्यादा-से-ज्यादा उनके तबादले वगैरह कर सकती है, कुछ दिनों के लिए लाइन हाजिर कर सकती है।

आपका मूल प्रश्न है कि क्या इसमें सूत्र के साथ विश्वासघात हुआ? नहीं। यह स्टिंग ऑपरेशन था, किसी सूत्र की ओर से अनाम रहने की शर्त पर जान-बूझकर दी गयी जानकारी नहीं, जिसमें अनाम रखने की शर्त पत्रकार ने तोड़ दी हो।

मुजफ्फरनगर में वास्तव में क्या हुआ, इस सच को किसी और तरीके से सामने लाना मुश्किल था, शायद असंभव। कोई पुलिस अधिकारी कैमरा सामने रखने पर आपको यह सब बातें नहीं बोल सकता। अगर आप इसे रिकॉर्ड नहीं करते और खुद कैमरे के सामने खड़े हो कर कह देते कि हमें पुलिस अधिकारियों से बातचीत में यह सब बातें पता चलीं, तो तुरंत आपकी विश्वसनीयता को ही संदिग्ध करार दे दिया जाता, आपको पक्षपाती बता दिया जाता। अगर स्टिंग करने के बाद भी आप पुलिस अधिकारियों की पहचान छुपा कर खबर दिखाते तो धुंधले चेहरों की आड़ में सच को भी धुंधला करने की कोशिश होती। जो लोग साफ तौर पर नंगे हो जाने के बाद भी कह रहे हों कि हम किसी दोषी को बख्शेंगे नहीं, मानो चोर ही थानेदार बन कर कह रहा हो कि चोर को जरूर पकड़ा जायेगा, वे धुंधधे चेहरों से सामने आने वाले सच को मानने से एक सिरे से ही इन्कार कर देते। सच इतना साफ-साफ दिखने के बावजूद क्या आपने कल सपा प्रवक्ता केी थेथर बातें नहीं सुनीं?

Arpit Jain
इस तरह के स्टिंग को देखने के बाद निश्चित रूप से कोई भी अधिकारी पत्रकारों से व्यक्तिगत सम्बन्ध रखने से पहले हजार बार सोचेगा और ऑफ दी रिकॉर्ड बात करने में भी परहेज करेगा। प्रभु चावला के जाने के बाद से आजतक की पत्रकारिता इतनी दोयम क्यों होती जा रही है ?

Ravindra Bharti
कोई भी अधिकारी पत्रकारों से व्यक्तिगत सम्बन्ध रखने से पहले हजार बार सोचेगा और ऑफ दी रिकॉर्ड बात करने में भी परहेज करेगा।

Mudit Mathur
I don’t think that it was an effort of a particular channel. I saw same news on Times Now and other channels also. Presentation may be different but content was more or less same. I feel it was not possible unless the forces who have invested money in such media have decided to favour or oblige some political alignments. I don’t feel any thing objectionable so far as it brings truth in public domain, but it is in deed against the professional ethics to divulge source of news or expose off the record talks exposing the source of news to be punished for speaking to you.

Srbjsm Balaji
सभी न्यूज़ चैनल से देश वासियों का भरोसा उठ चुका है, वही आज आज तक चैनल ने मुजफ्फरनगर दंगों का सच दुनिया के सामने लाकर देश भक्ति का परिचय दिया है,इस के लिए पूरी आज तक टीम बधाई की पात्र है,आज तक के जांबाज पत्रकारों ने बिना डरे ,बिना किसी की परवाह करे देश हित में जन हित में सच को सामने लाकर सेकुलर का सहारा लेकर दंगा फ़ैलाने वालो को बेनकाब किया है ,यदि आज तक चैनल एसे ही काम करता रहे तो मै सभी देश वासियों से अपील करूँगा की आप लॊग सिर्फ आज तक देखे।

गणेश कुमार
मुझफ्फरनगर में जब दंगा शुरू हुआ तो कोई मीडिया वाले इस समाचार को दिखा ही नहीं रहे थे और जब दिखाना शुरू किया तो ऑपरेशन स्टिंग दिखाने लगे। खैर पुलिस वालो को अब ज्यादा मसक्कत नहीं करनी परेगी असली चेहरे को पकड़ने में।

Amit Bravo
what aajtak did , is the favor of the public. whether its a twisted method or not, this helped us to know reality. so atleast this time I would say aajtak did great job.

नरेन्द्र सिंह
चौहान सच को मय सबूत के उजागर करना पत्र- कारिता का असली काम है । अगर यही नहीं होगा तो…….???
और मुज्जफर नगर जैसे अति सँवेदनशील मुद्दे पर तो यह और जरूरी हो जाता है ।
दुनियाँ को पता तो चला कि इन दंगों के पीछे कुत्सित सोच किसकी थी ।
———अब जनता चुनाव में जबाब देगी इस कुत्सित सोच का ।

Dalpat Singh Bhati आज तक ने इस ओपरेशन द्वारा पिछले सारे पाप धो दिए

Akhilesh Kumar पत्रकार धर्म के साथ विशवास घात ….

Amit Bravo “पत्रकारिता धर्म” can’t be bigger than “media’s duty for citizens”. aajtak did good job.

Brijendra Lodhi आजतक ने पत्रकारिता धर्म नहीं निभाया.

Siddhanath Shukla
Aap bhi mulayam singh ka chela hai kya? Desh ko sach janne ka adhikar hai. Sting operation karne wali team ko kotishh dhanyabad.

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