आजतक के पत्रकार प्रजातंत्र में जी रहे हैं या राजतंत्र में ?

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आजतक बताये कि 2013 के भारत को समझने के लिए महाभारत को समझना जरुरी है ?

आजतक की पैकेज
आजतक की पैकेज
ये है आजतक की पैकेज. लोकसभा 2014 के लिए कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों के दिग्गजों में वो सारे हथियार हैं जो अभी स्टार प्लस के महाभारत में दिखाई दे रहे हैं..

भाजपा और उसकी वैचारिकी का घनघोर विरोधी होते हुए, कांग्रेस की कारगुजारियों से दमभर असंतुष्ट होने के बावजूद मैं ऐसे पैकेज का विरोध करता हूं. ये सिर्फ दो पार्टियों की छवि नहीं है, लोकतांत्रिक ढांचे के भीतर हो रहे चुनाव को पौराणिकता में ले जाकर ठेलने और उसी हिसाब से देखने की बेहूदी कोशिशें हैं.

चैनल से ये सवाल जरुर किए जाने चाहिए कि क्या 2013 के भारत को समझने के लिए महाभारत को समझना जरुरी है और अगर हां तो इसमे जनता कहां है ?

आप यकीन करेंगे, ऐसे पैकेज कहीं से भी ये संकेत नहीं देते कि इस देश में लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं. ये सिर्फ नैतिक रुप से नहीं संवैधानिक रुप से भी उतना ही गलत है. ये देश को उन हजारों साल पीछे ले जाकर दिखाने की कोशिशें हैं जहां लोकतंत्र क्या, आधुनिकता के चिन्ह तक नहीं थे. एक तरफ तो चक्के पे चक्का, चलो बाजार( दिल्ली आजतक) और मोबाईल शो जैसे कार्यक्रमों के जरिए चैनल बताता है कि हमारा समाज बेहद अपडेट है, हालांकि इस स्तर पर अपडेट न भी हो तो बहुत फर्क नहीं पड़ता लेकिन जिन सामाजिक संरचना, प्रावधानों की बुनियादी समझ होनी चाहिए, वहां तेल लेने फिर उसी महाभारत में जाता है. 1992 के बाद की राजनीति को बीजेपी ने रामायण बनाने की कोशिश की और अब आजतक 2014 को महाभारत लेकिन गौर करें तो मीडिया की भूमिका इनके बीच खलनायक की यथावत बनी है.

(स्रोत – एफबी)

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