a2z चैनल में रहना है तो हाँ जी , हाँ जी कहना होगा

a2z-butteringमीडिया में चंपूगिरी और इस इन्डस्ट्री को चंडूखाना बनाने के लिए बहुत अधिक काबिलियत की जरुरत नहीं होती बल्कि इसके ठीक उलट जितने बड़े चम्मच रहें,वो उतने ही कायदे से ये काम कर सकता है. ये भी है कि अगर इस इन्डस्ट्री में आए लोगों को टीटीएम( ताबड़तोड़ तेल मालिश) करके ही अपनी जगह बनानी है तो इसकी शुरुआत किसी भी चैनल से की जा सकती है. इसका एक नमूना ए टू जेड चैनल में प्रसारित हो रही खबरों के तरीके को लेकर समझा जा सकता है.

चैनल में आए नए-नए एक शख्स की शह पर वहां के आका ने अपने एंकर और रिपोर्टरों को ये फरमान जारी किया है कि वो जिस किसी भी नेता का जिक्र करेंगे, उसके साथ जी लगाएंगे. जैसे मोदीजी, आडवाणीजी, जयराम रमेशजी आदि. हमने जब बुलेटिन में इस तरह के प्रयोग सुने तो न केवल बेहूदा लगा बल्कि चैनल में बैठे उस शख्स की मानसिक बुनावट पर तरस भी आयी. पत्रकारिता( जिसे कि न्यूज चैनलों के लिए जितनी जल्दी संभव हो, प्रयोग बंद कर देने चाहिए) का मूलभूत नियम ये कहता है कि किसी भी नाम के साथ अतिरिक्त सम्मानसूचक शब्द का प्रयोग नहीं किया जाता. ये सिर्फ शाब्दिक प्रयोग का मामला नहीं बल्कि खबरों और उनसे जुड़े लोगों के प्रति अपनी तटस्थता बनाए रखने का सांकेतिक प्रयोग भी है. जिन लोगों ने चैनलों में इन्टर्नशिप की है और सम्मान में ऐसा किया भी है तो संभवतः उनकी ये गलती जरुर दुरुस्त की गई होगी. हमारे साथ के ही कुछ लोग अपनी विचारधारा के प्रभाव में आकर कुछ व्यक्तियों के लिए जी शब्द का प्रयोग किया करते थे जिसे कि कॉपी एडीटर न केवल दुरुस्त करते बल्कि दो-तीन बार कर देने पर झाड़ लगा देते. लेकिन एटूजेड न्यूज पर ये नया सिलसिला शुरु हुआ है और ये काम आज ही कल में हुआ है.

वैसे तो खबरों की दुनिया में एटूजेड का कहीं कोई नाम नहीं है. बीच-बीच में इस चैनल की जो थोड़ी बहुत चर्चा हुई वो इसलिए कि बताया गया इसमें प्रवचन कारोबारी आसाराम बापू का पैसा लगा है और दूसरा कि जब सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस चैनल की स्कैनिंग करनी शुरु की तो चैनल ने खबर के बड़े स्लॉट में यही पाखंड-अंधविश्वास आदि के कंटेंट चलाए थे जबकि लाइसेंस खबरिया चैनल की मिली हुई है.

इस जी जी किए जाने के पीछे अंदरखाने से खबर आ रही है कि हाल ही में भोपाल से कोई जमालउद्दीन इस चैनल के अस्सिटेंट न्यूज हेड बनकर आए हैं, मालिक विजय कपूर ने ये आदेश संभवतः उन्हीं के इशारे पर दिया है. बहुत ही कम समय में ये चैनल के भीतर अपनी उटपटांग बातों और हरकतों के लिए खासे चर्चित हो रहे हैं. भोपाल में पीटीआई के संवाददाता थे और बडबोलेपन के शिकार लोगों के बीच ये हांकने में कभी नहीं चूकते कि उनका अहमद पटेल जैसे लोगों के साथ उठना-बैठना है. मिजाज से छुटभैय्ये नेता जमालउद्दीन चैनल को दरअसल सी ग्रेड की राजनीति का अड्डा बनाना चाहते हैं और ये जी-जी थिरेपी उसी की एक कड़ी है. अब इस बात में किस हद तक सच्चाई है ये अलग बात है पर इतना जरुर है कि उनकी इस हरकत से वहां समाचार पढ़ रहे लोग खासा परेशान हैं और जिसका असर स्क्रीन पर साफ दिखाई दे रहा है.

ये बात समझने में मुश्किल नहीं है कि इस देश में जो भी चैनल प्रसारित हो रहे हैं, उनका कोई न कोई राजनीतिक और कार्पोरेट एजेंडा है लेकिन ऐसे एजेंडे इस घिनौन रुप में हमारे सामने आएंगे, ये परेशान करनेवाली स्थिति जरुर है. ये न केवल चैनल और उसके लिए निर्देश जारी करनेवाले लोगों के मानसिक स्तर पर अफसोस जाहिर करने का मामला है बल्कि सीधे-सीधे तौर पर पत्रकारिता की बुनियादी शर्तों की खुलेआम धज्जियां उड़ाने का भी है. अब देखना है कि इस चैनल के दर्शक इस जी-जी प्रयोग को किस रुप में लेते है ?

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