वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा की पुस्तक ‘मीडिया: क्रांति या भ्रांति’का विमोचन

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राधेश्याम शर्मा की पुस्तक 'मीडिया क्रांति या भ्रांति' का विमोचन

विश्व हिन्दी सम्मेलन में केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया पुस्तक का विमोचन

राधेश्याम शर्मा की पुस्तक 'मीडिया क्रांति या भ्रांति' का विमोचन
राधेश्याम शर्मा की पुस्तक ‘मीडिया क्रांति या भ्रांति’ का विमोचन
भोपाल,16 सितम्बर । वरिष्ठ पत्रकार राधेश्याम शर्मा द्वारा लिखित पुस्तक ‘मीडिया: क्रांति या भ्रांति’का विमोचन विश्व हिन्दी सम्मेलन के समापन के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा किया गया। पुस्तक का प्रकाशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान सहित अनेक विशिष्टजन मंचासीन थे।यह पुस्तक श्री राधेश्याम शर्मा द्वारा समय-समय पर विविध विषयों,हालातों,चुनौतियों और खबरों पर लिखे गए आलेखों एवं संगोष्ठियों में पढ़े गए प्रपत्रों का संकलन है।

श्री राधेश्याम शर्मा विगत 6 दशकों से पत्रकारिता एवं मीडिया अध्यापन में सक्रिय हैं। वे माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के संस्थापक महानिदेशक रहे हैं। इनके द्वारा लिखित पुस्तक ‘मीडिया: क्रांति या भ्रांति,में मीडिया की विश्वसनीयता,उनके समक्ष उपस्थित चुनौतियों एवं मीडिया शिक्षा तंत्र की चुनौतियाँ का तार्किक विवेचन किया गया है। पुस्तक में प्रकाशित कुल 37 आलेखों को दो खण्डों क्रमशः मीडिया चिंतन एवं समाज चिंतन में विभाजित किया गया है। मीडिया चिंतन विषय खण्ड में 27 आलेख समाहित किए गए हैं,जबकि समाज चिंतन विषय खण्ड में 10 आलेख प्रकाशित किए गए हैं। पुस्तक के अंत में 17 पृष्ठों में श्री राधेश्याम शर्मा के पत्रकारीय योगदान को उल्लेखित करते हुए चित्र वीथिका प्रस्तुत की गई है। पुस्तक में प्रकाशित आलेखों में जहाँ एक ओर अखबारी जगत के भविष्य के प्रति नया चिंतन नजर आता है वहीं दूसरी ओर मीडिया के मनोरंजन रूपी उद्योग में परिवर्तित होने के प्रति चिंता भी है। पुस्तक में उस दौर के उन सभी महत्वपूर्ण विषयों का समावेश है जिन पर चिंतन जरूरी है। चाहे मीडिया में महिला सम्बन्धी खबरों की बात हो या हिन्दी मीडिया के सामने उभरती चुनौतियाँ हों,सभी को समाहित किया गया है। आलेखों के चुटीले शीर्षक जैसे ‘फोर्थ स्टेट’,का ढहना या ‘रियल स्टेट’में बदलना पाठकों को पुस्तक पढ़ने के लिए आकर्षित करेंगे। पुस्तक में साहित्य और मीडिया,मीडिया स्वामित्व,मीडिया में विदेशी धन,मीडिया और मानव अधिकार,मीडिया की विश्वसनीयता जैसे अनेक विषयों को समाहित किया गया है। इसके साथ-साथ मीडिया शिक्षा तंत्र की चुनौतियों के बारे में भी बताया गया है। वैश्विक विषयों पर भी पुस्तक में चिंतन किया गया है।

पुस्तक का प्रकाशन माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय द्वारा किया गया है। पुस्तक के विषय में बताते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बृजकिशोर कुठियाला ने कहा कि प्रिंट से इलेक्ट्रानिक और फिर सोशल मीडिया को भले ही संचार क्रांति का विस्तार कहा जाए,लेकिन इस विस्तार के फलस्वरूप आए परिवर्तनों से कोई असहमत नहीं होगा। मीडिया की दृष्टि से यह भी अनिवार्य है कि उसके विविध आयामों एवं उससे जुड़े अनुसांगिक विषयों पर वर्तमान के परिप्रेक्ष्य एवं ऐतिहासिक संदर्भों की चर्चा हो। श्री राधेश्याम शर्मा की पुस्तक उपर्युक्त सभी पहलुओं पर विचार करती है अतः विश्वविद्यालय द्वारा मीडियाकर्मियों एवं मीडिया विद्यार्थियों के उपयोग की दृष्टि से इस पुस्तक का प्रकाशन किया गया है।

विश्व हिन्दी सम्मेलन में हिन्दी में प्रकाशित प्रख्यात लेखकों की कृतियों का विमोचन किया जाता है। इसी अवसर पर सम्मेलन के समापन सत्र में 12 सितम्बर,2015 को केन्द्रीय गृह मंत्री श्री राजनाथ सिंह द्वारा पुस्तक का विमोचन किया गया। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान के अतिरिक्त छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह,हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर लाल खट्टर,केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन,पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री केशरीनाथ त्रिपाठी,गोवा की राज्यपाल श्रीमती मृदुला सिन्हा,विदेश राज्यमंत्री जनरल वी.के. सिंह,सांसद अनिल माधव दवे, मारिशस की मानव संसाधन एवं वैज्ञानिक अनुसंधान मंत्री श्रीमती लीला देवी दुखुन लक्षमुन तथा विदेश सचिव श्री अनिल वाधवा मंचासीन थे। कार्यक्रम में देश-विदेश के प्रख्यात हस्तियाँ,मीडियाकर्मी तथा हिन्दीसेवी उपस्थित थे।

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