बउआ का मजे ले लो डॉट कॉम, लूज टॉक, पोर्न टॉक

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2009

दिल्ली के रेड एफ( 93.5) पर एक अजीब सी आवाज में एक फिलर्स आता है- हैलो, अंकल ! मैं बउआ बोल रहा हूं. आमतौर पर अश्लील और द्विअर्थी शब्दों के प्रयोग के लिए बदनाम रेडियो जॉकी से अलग रौनक इस फिलर्स के जरिए अपनी तरफ से ऐसा कोई शब्द नहीं बोलते जिस पर कि आप आरोप लगा सकें.

उल्टे सुनने के दौरान आप दिल्ली के लोगों को कोसेंगे कि वो बात पीछे कितनी गाली देते हैं. ऐसे में इस फिलर्स के दौरान जितनी बीप का इस्तेमाल होता है, उसके आगे एमटीवी फेल है.

लेकिन ध्यान दें तो बउआ यानी रौनक बातचीत के साथ ऐसे शब्द या क्रियाएं जोड़ते हैं कि उसके बाद जिस ऑडिएंस से बात हो रही होती है वो गालियों के अलावे कुछ और बात नहीं करती. मसलन हैलो अंकल, कहते हैं अंधेरे में फायदा उठाना चाहिए.

उधर से सवाल होता है- अंधेरे में क्या हुआ जिसका जवाब बउआ का होता है- लड़का हुआ है, गोद लोगे ?

इसके बाद गालियों के बदले एक के बाद एक बीप. इस बीप के पीछे चैनल का ये उद्देश्य बिल्कुल भी नहीं होता कि श्रोता इसे न सुने बल्कि वो इसका हर हाल में अश्लील अर्थ ही समझे..तू अपनी…….में डाल ले, जो…..तेरे पास है, वो मेरे पास भी है. सुन…….तो तू भी खुश हो जाएगा और मुझे तो होना ही है.

इस पूरे फिलर्स की अंडरटोन में मजे लेने का अर्थ वो लूज टॉक, पोर्न टॉक शामिल है जो आमतौर पर यंग्सटर्स आपस में करते हैं लेकिन चैनल पर ये सबकुछ खुलेआम एक कार्यक्रम की शक्ल में जारी है.

(मूलतः तहलका में प्रकाशित)

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